क्यूबा के राष्ट्रपति पर अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध, ट्रंप बोले- इस मुद्दे को हम संभालेंगे

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मेरिका और क्यूबा के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल, उनकी पत्नी और कई बड़े अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिका ने यह कदम क्यूबा की सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया है। इन प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और तल्खी आ गई है। क्यूबा ने अमेरिका के इस फैसले को अपनी संप्रभुता पर हमला और खुली दखलअंदाजी बताया है।

 

अमेरिका ने जिन लोगों पर कार्रवाई की है, उनमें पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के बेटे एलेजांद्रो कास्त्रो एस्पिन और उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार ने इन सभी की अमेरिका में मौजूद संपत्तियों और बैंक खातों को फ्रीज करने का फैसला किया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन नेताओं की अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में बहुत कम हिस्सेदारी है। इसके बावजूद इस कदम को ट्रंप प्रशासन की कड़ी राजनीतिक चेतावनी माना जा रहा है।

 

क्या ट्रंप प्रशासन क्यूबा पर और दबाव बनाना चाहता है?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार क्यूबा की सरकार पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। जनवरी में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को हटाने के बाद ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा पर ऊर्जा नाकेबंदी भी लागू की थी। इससे क्यूबा में ईंधन संकट, बिजली कटौती और खाद्य संकट और गहरा गया। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा पहले से ही लगभग टूट चुका है और अमेरिका इस मुद्दे को भी संभालेगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्यूबा के पास सुंदर जमीन और पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन वहां की सरकार देश को सही तरीके से नहीं चला रही।

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क्यूबा ने अमेरिका के आरोपों पर क्या जवाब दिया?

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने अमेरिका पर नए तनाव पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा को झुकाने और वहां के लोगों को परेशान करने की कोशिश कर रहा है। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है जिससे दोनों देशों के बीच टकराव बढ़े। क्यूबा सरकार ने साफ कहा कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकेगी नहीं।

 

किन संस्थाओं और लोगों को निशाना बनाया गया?

अमेरिका ने सिर्फ नेताओं पर ही नहीं, बल्कि क्यूबा की कई सरकारी और सामाजिक संस्थाओं पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें क्यूबा का रक्षा मंत्रालय, ‘इंस्टीट्यूट फॉर द फ्रेंडशिप विद द पीपल्स’, पर्यटन से जुड़ी संस्था एमिस्टुर क्यूबा और ‘कमेटीज फॉर द डिफेंस ऑफ द रिवोल्यूशन’ शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति डियाज-कैनेल की पत्नी लिस कुएस्ता पेराजा और उनके सौतेले बेटे मिगुएल एनिडो कुएस्ता पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।

 

क्या अमेरिका पहले भी ऐसे प्रतिबंध लगा चुका है?

अमेरिका इससे पहले भी कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और उनके परिवारों पर प्रतिबंध लगा चुका है। सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर अल-बशीर, जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो पर भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन क्यूबा की मौजूदा सरकार को बातचीत के लिए मजबूर करना चाहता है। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि इस दबाव से दोनों देशों के रिश्ते और ज्यादा खराब हो सकते हैं।

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