एआई इम्पैक्ट लीडरशिप सम्मेलन 2026 के औपचारिक उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कई अहम बातें बताईं। उन्होंने कहा कि नई तकनीक को लेकर शुरू में संदेह होता है, लेकिन ये नई पीढ़ी अब जिस तरह से एआई का इस्तेमाल कर रही है, वो अभूतपूर्व है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई ने मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा दिया है, लेकिन उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई तकनीक को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की जरूरत है। आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री के संबोधन की बड़ी बातें कौन-कौन सी रहीं..
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- प्रधानमंत्री ने कहा भारत नई तकनीक बनाता है और साथ ही तेजी से नई तकनीक को अपनाता भी है।
- प्रधानमंत्री ने कहा, भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक पूल का केंद्र है। यह वैश्विक दक्षिण के लिए गर्व की बात है कि एआई सम्मेलन भारत में हो रहा है।
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- प्रधानमंत्री ने कहा, एआई मशीनों को बुद्धिमान बना रहा है, लेकिन इससे भी ज्यादा मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रहा है। इस बार सबसे बड़ा अंतर ये है कि इस बार गति अभूतपूर्व है और इसका स्तर भी बहुत विस्तृत है। पहले तकनीक का असर दशकों में जाकर दिखता है। आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन की यात्रा पहले के मुकाबले बहुत तेज है।
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- प्रधानमंत्री ने एआई को जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने की अपील करते हुए कहा, ‘जिस तेजी से युवा वर्ग एआई को अपना रहा है, वह बेहद सराहनीय है। युवाओं में एआई सम्मेलन को लेकर गजब का उत्साह है। हमें अपना विजन बड़ा करने की जरूरत है और साथ ही ये एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। मौजूदा पीढ़ी के साथ हमें इस बात की भी चिंता है कि एआई को किस रूप में हम आने वाली पीढ़ी को सौंपेंगे। असल सवाल ये नहीं है कि हम एआई से भविष्य में क्या कर सकते हैं बल्कि ये है कि हम वर्तमान में एआई से क्या करें? ऐसे सवाल मानवता के सामने पहले भी आए हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण परमाणु ऊर्जा है। हमने इसकी तबाही को देखा और साथ ही इसके सकारात्मक योगदान को भी देखा।’
- प्रधानमंत्री ने दुनिया को आगाह करते हुए कहा, एआई में बदलाव की ताकत है, लेकिन अगर ये ताकत दिशाहीन रही तो यह तबाही भी ला सकती है। एआई को मशीन केंद्रित से मानव केंद्रित बनाना, इसे संवेदनशील बनाना, ये इस वैश्विक एआई सम्मेलन का आधारभूत उद्देश्य है। इस सम्मेलन की थीम, भारत का एआई को लेकर परिपेक्ष्य दर्शाती है, जो है सभी का कल्याण, सभी की खुशी।
- प्रधानमंत्री ने कहा, ‘एआई के लिए अभी इंसान सिर्फ डाटा पॉइंट हैं लेकिन हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि हम एआई के लिए सिर्फ कच्चा माल बनकर न रह जाएं। इसलिए एआई का लोकतांत्रिकरण जरूरी है। यह इंसानों को सशक्त बनाने का माध्यम होना चाहिए। हमें एआई को खुली छूट देनी चाहिए, लेकिन साथ ही नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहिए। आज हम एआई को जिस दिशा में ले जाएंगे, वो ही हमारा भविष्य तय करेगी।’
- प्रधानमंत्री ने तकनीक में विश्वास की जरूरत पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज वैश्विक मानकों की स्थापना बेहद जरूरी है। डीपफेक और मनगढ़ंत कंटेंट समाज को अस्थिर कर रहा है। ऐसे में डिजिटल कंटेट पर प्रामाणिकता का लेबल होना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि क्या असली है और क्या एआई जनित। जैसे जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे ही वाटरमार्किंग और वैश्विक मानकों की जरूरत बढ़ती जा रही है। यह जरूरी है कि इस तकनीक में शुरू से ही विश्वास बनाकर रखा जाए।
- प्रधानमंत्री ने एआई को लेकर मानवीय विजन पेश करते हुए मानव का अर्थ बताया कि M का अर्थ है नैतिक और नीतिपरक प्रणालियां (Moral and Ethical Systems), A का मतलब जवाबदेह शासन (Accountable Governance), N का मतलब राष्ट्रीय संप्रभुता (National Sovereignty), A का अर्थ सुलभ और समावेशी (Accessible and Inclusive), और V का मतलब वैध और विश्वसनीय (Valid and Legitimate)। भारत का यह मानव विजन 21वीं सदी की एआई आधारित दुनिया में मानवता के कल्याण की महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा।
- प्रधानमंत्री ने कहा भारत, एआई में उज्जवल भविष्य देखता है। हमारे पास प्रतिभा, ऊर्जा क्षमता और नीतिगत स्पष्टता है।








