देहरादून: कर्नाटक के बाद देश में दूनघाटी में मिली फूलों की दुर्लभ इपोमिया कैरिका प्रजाति, इसकी भी हुई पहचान

दूनघाटी और शिवालिक की पहाड़ियों में फूल की ऐसी प्रजाति मिली है, जो अभी तक केवल कर्नाटक में पाई जाती थी। जी हां, इपोमिया कैरिका का यह बारहमासी फूल दूनघाटी को महका रहा है। खास बात ये है कि देश में इस फूल की पहचान का कर्नाटक के बाद ये दूसरा मामला है। वहीं, एक अन्य प्रजाति परसिकारिया पल्छरा की भी पहचान दून घाटी में हुई है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के विशेषज्ञ मोनल आर जाधव, रेवन वाई चौधरी और तनवीर ए खान ने अध्ययन के बाद दोनों प्रजातियों की पहचान संबंधी शोध प्रकाशित हुआ है। दून घाटी और उससे लगी शिवालिक पहाड़ियों में किए गए सर्वेक्षण के दौरान यह महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

 

शोध के दौरान कॉन्वॉन्व्युलेसी परिवार से संबंधित इपोमिया कैरिका वैराइटी अपेंडिकुलता नामक पौधे की प्रजाति खोजी गई है। यह खूबसूरत बारहमासी पर्वतारोहण पौधा है, जिसके फूलों की पंखुड़ियों के बाहरी हिस्से पर पंख जैसी संरचनाएं होती हैं। इससे पहले यह दुर्लभ किस्म मुख्य रूप से कर्नाटक में पाई जाती थी। उत्तर भारत में इस प्रजाति की यह पहली और पूरे देश में दूसरी रिपोर्ट है, जिसे देहरादून में 620 मीटर की ऊंचाई पर दर्ज किया गया है।

 

परसिकारिया पल्छरा की भी हुई पहचान

शोधकर्ताओं ने पॉलीगोनैसी परिवार से ताल्लुक रखने वाली परसिकारिया पल्छरा प्रजाति के पौधों को भी दूनघाटी में खोज निकाला है। यह एक प्रकंदयुक्त शाकीय पौधा है जो मुख्य रूप से एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है। भारत के असम, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड के देहरादून में भी इसका नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।

और पढ़े  देहरादून: हाईटेक सिम बॉक्स से चल रहा संदिग्ध कॉल सेंटर पकड़ा, ग्राहकों को धमकाकर ठगी का आरोप, 2 गिरफ्तार

 

विकास कार्यों की गति से मुरझा न जाएं फूल

वैज्ञानिकों ने अपने शोध के साथ इस बात पर भी चिंता जताई है कि विकास कार्यों की गति के आगे ये दुर्लभ किस्म की प्रजातियां मुरझा न जाएं। उन्होंने ये चेतावनी दी है कि दून घाटी में बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण प्राकृतिक आवासों में तेजी से संकुचन हो रहा है। इस तरह के तेज विकास कार्यों से स्थानीय मूल वनस्पतियों के प्राकृतिक आवासों को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है, जिस पर समय रहते ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • Related Posts

    जाम से हाहाकार: नैनीताल की बिगाड़ी यातायात व्यवस्था, डायवर्ट रूट से ज्योलीकोट पहुंचे पर्यटकों ने दिया धरना

    तीन दिन की छुट्टी के चलते नैनीताल में उमड़ी पर्यटकों की भीड़ का असर ज्योलीकोट मार्ग पर भी देखने को मिला। रविवार को ज्योलीकोट में लंबा जाम लगने से पर्यटक…

    उत्तराखंड / चंपावत: युवाओं को सौगात, डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ा, कुक्कुट पालकों को दो करोड़ की सब्सिडी, जानें..

    राज्य गठन के करीब 26 साल बाद पहली बार चंपावत जिले के बनबसा में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चुनावी वर्ष में सरकार ने…