प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पांडुलिपि धरोहर पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ज्ञान भारतम पोर्टल की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने ज्ञान भारतम मिशन के तहत भारत की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की बात पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि ये पांडुलिपियां भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत की जीवित धरोहर हैं, जो हमारी विविधता में एकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 80 भाषाओं में लिखी गई ये पांडुलिपियां ज्ञान का एक विशाल समुद्र हैं। इनमें संस्कृत, प्राकृत, असमिया, बंगाली, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मराठी जैसी भाषाएं शामिल हैं। उन्होंने गिलगित पांडुलिपि का उदाहरण देते हुए बताया कि ये कश्मीर के इतिहास की असली जानकारी देती है।
बता दें कि ज्ञान भारतम एक डिजिटल मंच है, जिसका उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण, डिजिटलीकरण और उनके पारंपरिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार करना है। इस सम्मेलन का विषय पांडुलिपि धरोहर के माध्यम से भारत की ज्ञान परंपरा की पुनर्प्राप्ति है, जो कि 11 से 13 सितंबर तक संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है।









