महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर सियासत सातवें आसमान पर है। बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की लहर भी तेज होती दिख रही है। कारण है कि मराठा आरक्षण की मांग को लेकर सक्रियता दिखा रहे मनोज जरांगे के अनशन का आज तीसरा दिन है। जरांगे और उनके समर्थकों का विरोध प्रदर्शन मुंबई के आजाद मैदान पर हो रहा है, जहां भारी संख्या में जमा होकर लोग सरकार से 10 प्रतिशत मराठा आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाकों में ट्रैफिक पर गहरा असर देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर ही नहाते भी नजर आए।
इस दौरान मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की क्योंकि उन्होंने खुद उनके साथ बातचीत करने के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश संदीप शिंदे को भेजा था। जरांगे ने कहा कि आरक्षण देने का फैसला न्यायाधीश का काम नहीं है और उनका अनशन इसी मांग को लेकर जारी रहेगा। वहीं फडणवीस सरकार ने कहा है कि वे संवैधानिक और कानूनी ढांचे के भीतर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि एनसीपी के नेता शरद पवार ने कहा कि आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी है।
अब बात अगर जरांगे की मांग की करें तो अनशन पर बैठे जरांगे चाहते हैं कि मराठाओं को कुंभी जाति के रूप में मान्यता दी जाए, क्योंकि कुंभी ओबीसी श्रेणी में आते हैं, जिससे मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिलेगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठाओं को कुंभी घोषित कर आरक्षण देना चाहिए और हैदराबाद और सातारा के गजट नोटिफिकेशन को कानून बनाया जाए। हालांकि ओबीसी नेता इस मांग का विरोध कर रहे हैं।

उधर जरांगे की इस मांग को लेकर सरकार की ओर से न्यायाधीश संदीप शिंदे ने बताया कि वे इस मामले में सीधे कोई रिपोर्ट देने के अधिकारी नहीं हैं, बल्कि यह पिछड़ा वर्ग आयोग का काम है। उन्होंने यह भी कहा कि जाति प्रमाणपत्र व्यक्तिगत स्तर पर दिया जाता है, न कि पूरे समुदाय के लिए।
अनशन पर क्या बोले राधाकृष्ण विखे?
इस बीच, राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि मराठा आरक्षण संबंधी मुद्दों पर कैबिनेट की उप-समिति ने विस्तार से चर्चा की है और सरकार इसे सकारात्मक रूप से हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। मराठा समाज के लिए यह आंदोलन उनके अंतिम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हैं और उनकी मांग है कि सरकार जल्द से जल्द मराठा आरक्षण प्रदान करे।
प्रदर्शन स्थल पर सुविधाओं को लेकर बीएमसी पर निशाना
दूसरी ओर इन सबके बीच प्रदर्शन स्थल पर पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने शिकायत की। मनोज जरांगे ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आयुक्त और राज्य द्वारा नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी भूषण गागरानी पर प्रदर्शनकारियों को भोजन और पानी उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है।









