आज है कान्हा जी की छठी,जानें क्या है पूजन विधि और महत्व

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ज कान्हा जी की छठी है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद परंपरा के अनुसार छठवें दिन बाल गोपाल की छठी मनाई जाती है। हिंदू मान्यता के अनुसार जैसे घरों में शिशु जन्म के छह दिन बाद छठी का आयोजन होता है, उसी तरह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद भी यह उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसे लड्डू गोपाल की छठी भी कहा जाता है। इस अवसर पर मंदिरों और घरों में विशेष पूजा, भोग और उत्सव का आयोजन किया जाता है।

इस दिन बाल गोपाल को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें प्रिय व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। भक्त पूरे श्रद्धा भाव से पूजन करते हैं और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल कान्हा जी की छठी कब मनाई जाएगी।

श्रीकृष्ण की छठी कब है?

श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। जन्म के छठे दिन यानी भाद्रपद की चतुर्दशी को उनकी छठी मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 21 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा।

विशेष योग
इस साल कृष्ण छठी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में किया गया कार्य अत्यंत फलदायी माना जाता है।

पूजन के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:26 से 05:10 तक
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 11:58 से 12:50 तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02:34 से 03:26 तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06:54 से 07:16 तक
अमृत काल – शाम 05:49 से 07:24 तक

छठी पर अर्पित किए जाने वाले भोग

कान्हा जी की छठी पर कढ़ी-चावल का भोग विशेष रूप से शुभ माना गया है। इसके अलावा माखन, मिश्री और मालपुआ भी लड्डू गोपाल को अर्पित किया जा सकता है।

पूजन की विधि

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर उस पर बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें।
  • पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं और चंदन-तिलक, पुष्प-माला से सजाएं।
  • घी का दीपक प्रज्वलित कर आरती करें और भोग अर्पित करें।
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अस्वीकरण- यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए “न्यू भारत” उत्तरदायी नहीं है।


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