निर्भया कांड के 12 साल: दोषियों को हो गई फांसी, पर आज भी न जाने क्यों थाने के सामने खड़ी है ये मनहूस बस,आखिर अब तक क्यों नहीं हुई स्क्रैप?

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मघोंटू प्रदूषण के चलते राष्ट्रीय राजधानी में पुराने वाले को स्क्रैप के लिए भेज दिया जाता है। मगर दक्षिण-पश्चिमी जिले के सागरपुर थाने के सामने पिट में खड़ी वसंत विहार की दर्दनाक वारदात में इस्तेमाल की गई बस नंबर 0149 आज भी पुलिस अधिकारी, कर्मी, पीड़िता से जुड़े लोग और स्थानीय लोगों को दर्दनाक जख्म को कुरेद रही है। दिल्ली पुलिस की भारी लापरवाही के चलते ऐसा हो रहा है। निर्भया कांड केस खत्म होने व दोषियों को सजा होने के बावजूद से बस पिट में खड़ी है। केस से जुड़े किसी पुलिस अधिकारी व पुलिसकर्मी व अन्य अधिकारियों को याद नहीं आया कि केस खत्म होने के बाद वाहन, ड्रग्स व शराब आदि चीजों को नष्ट कर दिया जाता है।

12 साल पहले आज यानि रविवार 16 दिसंबर की रात राजधानी दिल्ली की सड़कें जिस दरिंदगी की गवाह बनी थीं, उससे पूरा देश दहल गया था। क्या बच्चे, क्या बूढ़े, देश के हर नागरिक की आंखों में अंगारे भड़क रहे थे और सब लोग न्याय की लड़ाई के लिए सड़क पर उतर आए थे। यादव ट्रैवल्स की नंबर 0149 वही बस है, जिसमें वसंत विहार सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया था। इस बस को देखकर दिल्ली पुलिस से लेकर आसपास रहने वाले लोग आज भी गुस्से से बौखला उठते हैं। मगर बस को खत्म करने वाली प्रक्रिया को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। यहीं वजह है कि अब भी बस सागरपुरी थाने के सामने खड़ी है।

केस प्रॉपर्टी को खत्म करने का ये है नियम
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार अगर केस खत्म होने के 90 दिन के भीतर बस मालिक अपील नहीं करता है तो फिर पुलिस की जिम्मेदारी हो जाती है। जिस जिले में वारदात हुई है उसे जिले का पुलिस नाजिर डिस्पोजल करवाता है। या तो बस को ऑक्शन किया जाता है या फिर प्रॉपर्टी के खराब हालत में होने पर कोर्ट से आदेश लेकर नष्ट कर दिया जाता है। इसमें नए कानून आने से बहुत पहले गाइडलाइन तैयार की गई थी।

इसी बस में हुई थी हैवानियत
इस केस की जांच में शामिल रहे पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब वह इस बस को देखते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं और गुस्सा आ जाता है। घटना के बाद इस बस को सागरपुर स्थित पिट में छिपाकर रखा हुआ है। वारदात से लेकर करीब दो वर्ष पहले तक इस बस को त्यागराज स्टेडियम, वसंत विहार समेत कई जगहों पर छिपाकर रखा हुआ था। बस अब खटारा हालत में है। उसमें लगे पर्दे फट चुके हैं। अंदर की स्थिति भी खराब हो चुकी है। और यह लोहे के ढ़ांचे में तब्दील हो चुकी है।

ऐसे हुई थी हैवानियत
निर्भया कांड की जांच के लिए बनी एसआईटी के सदस्य रहे व इस समय एसीपी द्वारका राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस बस के मालिक दिनेश यादव हैं। बस सुबह व शाम के समय नोएडा सवारी लेकर जाती थी। इसके अलावा बिड़ला विद्या निकेतन स्कूल में लगी हुई थी। आरके पुरम के सेक्टर-तीन स्थित रविदास कैंप में रहने वाला राम सिंह इस बस का ड्राइवर था। वारदात वाले दिन चालक अन्य आरोपियों को लेकर मुनिरका बस स्टैंड पर पहुंच गया। पीड़ित युवक व निर्भया इस बस में द्वारका जाने के लिए बैठ गए। इसके बाद आरोपियों ने चलती बस में पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़ित लड़का व लड़की को एनएच-8 पर फेंक दिया था। आरोपियों ने पीड़ितों पर बस का पहिया चढ़ाने की कोशिश की थी।

सकून से ज्यादा दर्द देती है
निर्भया केस की जांच के लिए बनी एसआईटी के प्रमुख व अब दिल्ली पुलिस से रिटायर हो चुके एसीपी राजेंद्र सिंह ने बताया कि हालांकि एक पुलिसकर्मी के लिए ये बस इस सफलता को बताती है कि वह दरिंदों को सजा दिलाने में कामयाब रहे।

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