शाहजहांपुर: खेत जोताई के दौरान मिला हथियारों का जखीरा, तलवारें देख दंग रह गया किसान

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शाहजहांपुर में एक खेत की जोताई के दौरान भारी मात्रा में हथियार बरामद किया गया है। इन हथियारों का संबंध साल 1857 की स्वतंत्रता क्रांति से बताया जा रहा है। बता दें कि इन हथियारों को सुरक्षित मालघर में रख दिया गया है और पुरातत्व विभाग को जिला प्रशासन द्वारा खत लिखा गया है।
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने शु्क्रवार को कहा, “निगोही थाना क्षेत्र के ढकिया परवेजपुर के रहने वाले किसान बाबूराम बीते दिनों अपने खेत की जोताई कर रहे थे। इस दौरान जमीन के भीतर से उन्हें लोहे की तलवार जैसी कोई चीज मिलती है। इसके बाद जब वहां और खुदाई होती है तो जमीन के नीचे दबे हुए कई हथियार बाहर आ जाते हैं।”

खुदाई में खेत से मिला हथियारों का जखीरा

उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे जमीन की खुदाई की गई, वैसे-वैसे हथियार मिलते गए। खुदाई के दौरान खेत से कुल 23 तलवारें, 12 मैचलॉक राइफल के अवशेष, एक भाला और एक खंजर बरामद हुआ। बता दें कि खुदाई के दौरान जो बंदूक बरामद हुए हैं, उनकी केवल नाल और लोहे के टुकड़े बचे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मिट्टी में दबे होने के कारण बंदूक की लकड़ी को दीमक खा गई होगी। हालांकि बंदूक की बनावट जिस तरीके की है, वह मैचलॉक राइफल ही लग रही है। जिलाधिकारी ने आगे बताया कि इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित उपजिलाधिकारी को अपने साथ अधिकारियों के साथ मौके पर भेजा गया है। साथ ही बरामद हथियारों को निगोही थाने के मालखाने में रखवाया गया है।
शाहजहांपुर स्थित स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर विकास खुराना की मानें तो ढकिया परवेजपुर गांव में जो हथियार मिले हैं, उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों रोहिल्ला संस्कृति के हैं। ऐसी संभावना है कि जब साल 1857 में स्वतंत्रता संग्राम हुआ था, उस समय पराजित क्रांतिकारियों के पीछे ब्रिटिश फौज आई थी। इस दौरान क्रांतिकारी जंगल में भाग गए। उन्होंने कहा कि ऐसी संभावना है कि उसी वक्त क्रांतिकारियों ने जमीन खोदकर अपने हथियार छिपा दिए होंगे। क्योंकि सेना जो युद्ध जीत जाती है वह अपने हथियार नहीं छिपाती है।

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