उत्तराखंड/चमोली :–प्रवासी युवक स्वरोजगार अपनाकर कर रहे हैं शहरों की तरफ भागने वालों को प्रेरित।

यूं तो कोराना काल आम लोगों की जिन्दगी में बहुत खट्टे और कडुवे अनुभवों को लेकर आया।कोविड के लॉकडाउन ने सबसे बुरा असर लोगों के रोजगार पर डाला है। रोजगार की तलाश में शहरों की तरफ गये ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं या दूसरे लोगों ने अपने जीवन में कभी इस तरह की कल्पना भी नहीं की होगी कि जिन शहरों के लिए उन्होंने अपने घर,गांव,गलियों को छोड़कर भागे भागे आकर उन शहरों के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है, एक दिन उन्हीं शहरों से बेरोजगार हो जाने के साथ ही जान बचाकर भागना पड़ेगा। लेकिन युवाओं और लोगों ने जो कभी कल्पना नहीं की थी वह तो हो ही गया। रोजगार छिन जाने का भयावह दौर रहा है यह।

लेकिन अब शहरों की चकाचौंध में कोरोना की मार के कारण बेसहारा हो जाने के काले दौर ने बहुत सारे युवाओं की सोच और समझ को नया आयाम भी दिया है।इसी सोच और समझ के कारण अब तक शहरों पर आश्रित रहने वाले लोगों और युवाओं ने अपने पहाड़ में ही अब स्वरोजगार अपनाने की राह चुनी है।

इसके क्रम में चमोली जिले के नारायणबगड़ प्रखंड में मींगगधेरा बाजार में शहरों से दो और बेरोजगार हुए युवाओं ने हवाई चप्पल की इकाइयों की स्थापना कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।यह युवक हैं देवपुरी-निलाड़ी गांव के बृजेश भंडारी और बैनोली गांव के बीरेंद्र सिंह।युवाओं का ऐसे स्वरोजगार की दिशा में किए गए प्रयास पलायन से खाली होते पहाड़ों को पुनर्जीवन दे सकने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।

इन युवाओं से बातचीत करने पर इन्होंने कहा कि कोरोनाकाल के चलते शहरों में बेरोजगारी और भुखमरी के कारण घर -गांव लौटने में उन्हें बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।ऐसे में हमने अपने घर गांव के आसपास ही रोजगार के लिए साधन जुटाने की कोशिश की है।

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नि:शंदेह ऐसे लोगों के लिए सरकार को बेहतर संसाधनों और उपकरणों आदि के लिए खुले मन से आर्थिक सहायता देने की जरूरत है। इसके चयन हेतु बकायदा ऐसे स्वरोजगार की इकाइयों का सर्वेक्षण किये जाने की भी आवश्यकता है। क्योंकि बहुत सारे युवा सरकारी आर्थिक सहायता के लिए आवेदन इसलिए भी नहीं करते हैं कि सरकारी पैसे बैंकों से इतनी आसानी से मिलते भी नहीं है।

बहरहाल हम भी अपने चैनल के माध्यम से ऐसे स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले लोगों को उत्साहित करेंगे ताकि दूसरे लोगों को भी पहाड़ में रुकने के लिए प्रेरित किया जा सके।इस तरह पहाड़ फिर से आबाद हो सकेगा। पहाड़ों में लोग रुकेंगे तो सरकारी विकास की संभावनाओं को भी ताकत व राह मिलेगी।तो आइए हम इन्हीं नौजवानों से आपको रूबरू कराते हैं।

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