घरेलू हिंसा के मामले में केवल आरोप लगाने से महिला को कानूनी राहत नहीं मिल सकती। उसे अपने साथ हुई हिंसा या प्रताड़ना के आरोपों को सबूतों के जरिये साबित भी करना होगा। कड़कड़डूमा कोर्ट ने पति व ससुराल वालों के खिलाफ महिला की याचिका खारिज कर दी।
बचाव पक्ष ने आरोप नकारे। कहा कि जनवरी 2021 में 10 लाख रुपये देकर विवाद सुलझा लिया गया था। अदालत के मुताबिक, महिला को सबूत देने के तीन मौके मिले, लेकिन उसने हलफनामा दाखिल नहीं किया। 26 सितंबर को उसका साक्ष्य पेश करने का अधिकार समाप्त कर दिया गया। अदालत ने कहा कि एकतरफा सुनवाई से आरोप साबित नहीं होते।






