साइबर ठगों ने सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बन और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से 30 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी दी। खुद को सीबीआई अधिकारी बताने वाले आरोपियों ने रकम की जांच के नाम पर उसे दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिया। बाद में पीड़ित के मोबाइल पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेजा गया। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित को सरकारी गवाह बनने का विकल्प दिया और इसके लिए गोपनीय समझौता करने की बात कही। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिये कथित सीबीआई निदेशक से बात कराई गई। फिर राहुल नाम के व्यक्ति ने खुद को सीबीआई से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके बैंक खातों में जमा रकम की जांच आरबीआई की निगरानी में होगी। उसने रकम एक खाते में ट्रांसफर करने पर एक-दो घंटे में वापस मिलने का भरोसा दिया।
30 लाख रुपये किए ट्रांसफर
धमकियों से घबराकर रिटायर कर्मचारी ने सात अक्तूबर को अपने बैंक खाते से आरटीजीएस के जरिये 30 लाख रुपये एसबीआई के मदुरै स्थित खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने दूसरे खाते में बची रकम भी जमा कराने का दबाव बनाया। नौ अक्तूबर को उन्हें ईडी का कथित फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा गया। ठगी का संदेह होने पर उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।







