उत्तराखंड: प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत, यूजेवीएनएल को झटका, लौटाएगा 48.08 करोड़ रुपये

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने अपनी गणना संबंधी चूक दुरुस्त करते हुए यूजेवीएनएल को झटका दिया है। जल विद्युत परियोजनाओं की बिजली दरों के निर्धारण में हुई गलती सुधारते हुए आयोग ने स्वत: संज्ञान आदेश जारी किया। अब यूजेवीएनएल, यूपीसीएल को 22.44 करोड़ के बजाए 48.08 करोड़ रुपये लौटाएगा। इससे यूपीसीएल के वित्तीय घाटे में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को होगा।

आयोग ने इसी साल 30 मार्च को यूजेवीएनएल की 11 बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 का ट्रू-अप(वास्तविक खर्चों का मिलान) आदेश जारी किया था। उस आदेश में आयोग ने यूजेवीएनएल पर 18.60 करोड़ रुपये का अधिशेष निकालते हुए, ब्याज मिलाकर कुल 22.44 करोड़ रुपये यूपीसीएल को लौटाने का निर्देश दिया था। यूजेवीएनएल ने अप्रैल से हर महीने 1.87 करोड़ रुपये की किस्त के रूप में यह रकम लौटानी शुरू कर दी थी। जुलाई तक 7.48 करोड़ रुपये लौटा दिए थे।

आदेश जारी होने के कुछ समय बाद जब आयोग ने अपने रिकॉर्ड की दोबारा जांच की तो सामने आया कि पांच प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं छिबरो, खोदरी, रामगंगा, चीला और मनेरी भाली प्रथम में अतिरिक्त उत्पादन और उसकी दरों की गणना में गलती हुई थी। नियमों के अनुसार, सेकेंडरी एनर्जी केवल मूल डिजाइन क्षमता से अधिक उत्पादन पर ही अनुमन्य होती है। इस मानवीय भूल के कारण यूजेवीएनएल को 20.26 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल गया था।

आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने माना कि यह रिकॉर्ड पर प्रत्यक्ष त्रुटि है। आयोग ने अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नौ अक्तूबर को संशोधित आदेश जारी किया। अब कुल रिफंड राशि 22.44 करोड़ से बढ़कर 48.08 करोड़ रुपये पहुंच गई। यूजेवीएनएल को यह रकम यूपीसीएल के पास मार्च 2027 तक लौटानी है।

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धरासू पावर हाउस का होगा 54 करोड़ से कायाकल्प

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तरकाशी स्थित 304 मेगावाट क्षमता के मनेरी भाली-2(धरासू पावर हाउस) के जीर्णोद्धार और स्पेयर पार्ट्स की खरीद के लिए 54.06 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश को सशर्त मंजूरी दे दी है। यूजेवीएनएल ने इसके लिए 60.62 करोड़ की मांग की थी। भागीरथी नदी के सिल्ट-युक्त पानी के कारण टरबाइन के प्रमुख हिस्से जैसे रनर, टॉप कवर और गाइड वेन्स लगातार घिस रहे थे। 17 वर्षों में 11 से 16 बार तक इनकी मरम्मत हो चुकी थी। वर्ष 2008 का पुराना विंडोज 2000 आधारित स्काडा और गवर्नर सिस्टम भी पूरी तरह अप्रचलित हो चुका था। इस परियोजना के तहत नए स्पेयर पार्ट्स और अत्याधुनिक डिजिटल कंट्रोल सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।

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