छत्तीसगढ़ के कभी माओवादियों के गढ़ रहे अबूझमाड़ में एक सुरक्षा कैंप को आदिवासी छात्रों के लिए हॉस्टल में तब्दील कर दिया गया है। क्षेत्र में शांति कायम होने के साथ विकास की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाने वाली इस पहल की जानकारी एक अधिकारी ने रविवार को दी। अधिकारी ने बताया कि नारायणपुर जिले के भाटपाल गांव में की गई यह पहल बस्तर संभाग में अपनी तरह की पहली पहल है। पूर्व में सुरक्षा कैंप के रूप में इस्तेमाल होने वाला यह परिसर अब शिक्षा सहायता केंद्र के रूप में काम कर रहा है।
प्री-मैट्रिक एसटी बालक छात्रावास की स्वीकृत क्षमता कक्षा 6 से 10 तक के 100 छात्रों की है, जबकि वर्तमान में यहां 114 छात्र रह रहे हैं। वहीं, पोस्ट-मैट्रिक एसटी बालक छात्रावास में कक्षा 11वीं और 12वीं के 50 छात्रों के रहने की स्वीकृत क्षमता है। वर्तमान में यहां 39 छात्र रह रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि यह परिसर कुटुल स्थित एजुकेशन सिटी से जुड़े छात्रों की आवासीय जरूरतों को भी पूरा करता है। पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल उन छात्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिन्हें 10वीं कक्षा पूरी करने के बाद अपने स्कूल के आसपास निजी आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था।दूरदराज के गांवों के छात्रों के लिए शिक्षा तक पहुंच केवल स्कूल में दाखिले तक सीमित नहीं है। उन्हें लंबी दूरी की यात्रा, परिवहन और रहने की व्यवस्था जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।अधिकारी ने बताया कि हॉस्टल ने इन समस्याओं को काफी हद तक दूर कर दिया है। भाटपाल का सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हॉस्टल से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है।
प्री-मैट्रिक से पोस्ट-मैट्रिक स्तर तक आवास की सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य छात्रों को उच्च कक्षाओं तक अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद करना भी है, ताकि वे आवागमन और अन्य व्यावहारिक दिक्कतों के कारण पढ़ाई बीच में न छोड़ें। हलामीमुंजमेटा गांव के कक्षा 9 के छात्र रितेश सोनी ने बताया कि नई सुविधा से छात्र खुश हैं। यहां उन्हें सुरक्षित माहौल, स्कूल के पास रहने की सुविधा और अपने साथियों के साथ पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है। कक्षा 12वीं में पढ़ने वाले कोमेंद्र ने बताया कि इससे पहले उन्हें अपने स्कूल के पास अलग से रहने की व्यवस्था करनी पड़ती थी। उनका स्कूल उनके गांव राजबेड़ा से 20 किलोमीटर से अधिक दूर है। अब हॉस्टल मिलने से उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिल गया है, साथ ही उनके परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।
अधिकारी ने बताया कि कलेक्टर नम्रता जैन ने हाल ही में हॉस्टल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कमरों, भोजन व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी जरूरतों और समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली। अधिकारी के अनुसार, भाटपाल कैंप का यह बदलाव नारायणपुर में बदलती विकास प्राथमिकताओं को दर्शाता है। यहां सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, आजीविका और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। यह पहल यह भी दिखाती है कि सुरक्षा कारणों से तैयार किए गए मौजूदा बुनियादी ढांचे को किस तरह नई पीढ़ी के लिए शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यह क्षेत्र वर्षों तक नक्सली हिंसा के लिए जाना जाता रहा है। राज्य सरकार पहले ही कह चुकी है कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा कैंपों को धीरे-धीरे पुलिस थानों, स्कूलों, अस्पतालों, लघु वनोपज के संग्रह और प्रसंस्करण केंद्रों तथा अन्य सार्वजनिक सुविधाओं में तब्दील किया जाएगा। बस्तर क्षेत्र में नारायणपुर समेत सात जिले शामिल हैं।








