अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के हजारों मौजूदा व पूर्व कर्मियों का संवेदनशील निजी डाटा चोरी होना अमेरिकी इतिहास में सबसे गंभीर डाटा चोरी है। साइबर अपराधी समूह शाइनीहंटर्स ने इसे डाटा एजेंसी के नौकरी पोर्टल से चुराया और ऑनलाइन लीक करने की धमकी भी दी थी। इस हमले में हजारों कर्मियों के डाटा चोरी के साथ एजेंटों की जान को भी खतरा बताया जा रहा है।
हजारों कर्मचारियों के चोरी हुए डाटा में नशीले पदार्थ और रूस-चीन-ईरान से जुड़े राष्ट्रीय सुरक्षा डेस्क जैसी बेहद संवेदनशील जानकारियां भी उजागर हुई हैं। अब अमेरिकी विशेषज्ञों को चिंता है क शाइनीहंटर्स खुद डाटा सार्वजनिक करने की बजाय इसे दूसरे अपराधी या किसी देश को बेच सकते हैं।
ब्रिटेन की साइबर सुरक्षा एजेंसी के पूर्व प्रमुख सिरन मार्टिन के अनुसार इस सेंध का एफबीआई की परिचालन-क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। यह एक दशक पहले हुई अमेरिकी कार्मिक प्रबंधन कार्यालय की सेंध से भी बदतर है, जिसमें चीन ने दो करोड़ से अधिक रिकॉर्ड चुराए थे।
बदला था मकसद शाइनीहंटर्स के अनुसार उन्होंने एफबीआई पर इसलिए हमला किया क्योंकि उसे बदला लेना था। दरअसल, एफबीआई ने वसंत में चेतावनी जारी की थी कि शाइनीहंटर्स समूह पीड़ितों को धमकाकर परेशान करता है। हैकरों ने मांग की थी कि एफबीआई उस चेतावनी को हटाए।
ऐसे लगाई सेंध : शाइनीहंटर्स के मुताबिक उन्होंने ओरेकल पीपलसॉफ्ट सॉफ्टवेयर में एक जीरो-डे यानी पहले से अनजान खामी का इस्तेमाल किया। हालांकि गूगल ने बताया कि उसकी खुफिया टीम ने हाल में शाइनीहंटर्स को ओरेकल पीपलसॉफ्ट की उस खामी के जरिये हमले करते देखा है।








