अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब को एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने सांसदों से कहा कि वे सऊदी अरब को 48 एफ-35 की बिक्री को मंजूरी दें। इस सौदे की अनुमानित लागत 24.3 अरब डॉलर है।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार को दावा किया कि उन्होंने मारीब के ऊपर एक सऊदी एफ-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। मारीब यमन का एक अहम शहर है। यहां हूती विद्रोही सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेना से लड़ रहे हैं।
हूती विद्रोहियों का दावा है कि विमान को ‘स्थानीय रूप से बनाए गई’ जमीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल से गिराया गया। अगर यह दावा सही है, तो इससे क्षेत्र में युद्ध लड़ने की हूती विद्रोहियों की क्षमता में बड़ा बदलाव माना जाएगा। अब तक यमन में सऊदी अरब की सेना को हवा में बढ़त हासिल रही है। उसने पड़ोसी देश यमन में हवाई हमले करने की अपनी क्षमता पर काफी भरोसा किया है।
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई गुरुवार को और तेज हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संघर्ष में पांच लोगों की मौत हुई। इनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं।
सऊदी अरब ने लंबे समय से वाशिंगटन से कहता रहा है कि वह हूती लड़ाकों के साथ उसके संघर्ष में सीधे तौर पर भूमिका निभाए। लेकिन अमेरिका ने कहा है कि वह इस संघर्ष में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेगा। यह संघर्ष ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों, सऊदी अरब और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच है।
चीन को लेकर अमेरिका की चिंता क्या है?
वाशिंगटन को इन विमानों को लेकर चीन की संभावित जासूसी की भी चिंता है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस हफ्ते खबर दी कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने इसकी आशंका जताई है। बीजिंग सऊदी अरब के साथ अपनी साझेदारी के जरिये एफ-35 की तकनीक हासिल कर सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के प्रतिनिधि राजा कृष्णमूर्ति ने इसी आधार पर इस सौदे का विरोध किया। वह प्रतिनिधि सभा की खुफिया समिति के डेमोक्रेटिक सदस्य हैं।
इस्राइल के अधिकारियों ने क्या कहा?
सऊदी अरब लंबे समय से F-35 विमान खरीदना चाहता है। लेकिन इस्राइल के अधिकारियों ने रियाद को इन विमानों की बिक्री पर चिंता जताई है। इस्राइल इस क्षेत्र का एकमात्र देश है, जिसके पास एफ-35 विमान हैं। यह चिंता ऐसे समय भी सामने आई है, जब सऊदी अरब के साथ संबंध सामान्य करने की कोशिश चल रही है।
तुर्किये नाटो का सदस्य है। उसने कई देशों के साथ मिलकर एफ-35 विमानों के विकास में हिस्सा लिया था। लेकिन 2019 से तुर्किये को ये विमान नहीं दिए गए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने रूस से विमान रोधी मिसाइलें खरीदी थीं।







