हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिजली कनेक्शन जारी करना और लाइन बिछाने में आने वाली बाधाओं को दूर करना बिजली वितरण कंपनी यानी बिजली बोर्ड का वैधानिक कर्तव्य है। बोर्ड किसी उपभोक्ता को राइट ऑफ वे यानी रास्ता उपलब्ध न होने का बहाना बनाकर बिजली आपूर्ति से वंचित नहीं कर सकता।
एक मामले में शिमला के गलोट गांव निवासी दया राम के मकान के ऊपर से खतरनाक सिंगल-फेज बिजली लाइन गुजर रही थी। बिजली बोर्ड ने नई वैकल्पिक लाइन तो बिछा दी थी, लेकिन रास्ते के विवाद के चलते उसे चालू नहीं किया गया और पुराने खंभे व तार भी नहीं हटाए गए। कोर्ट ने दया राम की याचिका स्वीकार करते हुए बिजली बोर्ड को छह सप्ताह के भीतर नई लाइन चालू करने तथा याचिकाकर्ता के घर के ऊपर से पुराने खंभे और तार हटाने के आदेश दिए।
वर्ष 2013 से लंबित था थ्री-फेज कनेक्शन
दूसरे मामले में वीना ठाकुर ने वर्ष 2013 में थ्री-फेज बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था और निर्धारित फीस भी जमा कर दी थी। इसके बावजूद अन्य भू-मालिकों के विरोध और राइट ऑफ वे उपलब्ध न होने का हवाला देकर बोर्ड ने वर्षों तक कनेक्शन जारी नहीं किया।
हाईकोर्ट ने बोर्ड की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए छह सप्ताह के भीतर वीना ठाकुर के परिसर में थ्री-फेज बिजली कनेक्शन स्थापित करने के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि बिजली कनेक्शन देना बोर्ड की जिम्मेदारी है और रास्ते या तीसरे पक्ष के विवाद को उपभोक्ता के अधिकारों में बाधा नहीं बनने दिया जा सकता।








