सत्य निकेतन में 5 मंजिला पीजी इमारत गिरने की घटना पर हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई है। सोमवार को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि अधिकारी हादसे की जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। कोर्ट ने हाई लेवल जांच के साथ पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा जांच के निर्देश दिए।
सत्य निकेतन में डीयू के साउथ कैंपस के पास हॉस्टल डेज बॉयज पीजी की पांच मंजिला इमारत 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे ढह गई थी। हादसे में कई छात्रों की मौत हुई और घायल हुए। सुनवाई में चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। ये युवा जिंदगी शुरू कर रहे थे।
हॉस्टलों की कमी पर हाईकोर्ट चिंतित
- कोर्ट ने दिल्ली में सरकारी और यूनिवर्सिटी हॉस्टलों की कमी पर भी चिंता जताई।
- बेंच ने कहा कि बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल नहीं हैं।
- मजबूरी में उन्हें निजी पीजी और किराए की इमारतों में रहना पड़ता है।
- ऐसे में इनकी सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
- कोर्ट ने एमसीडी को जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया कि हादसे वाली इमारत के निर्माण के लिए वैध मंजूरी ली गई थी या नहीं।
- एमसीडी को एक सप्ताह में सभी पीजी और हॉस्टल का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया।
PG सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त
केंद्र सरकार, एमसीडी और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राहत-बचाव कार्य की जानकारी दी। उन्होंने हादसे के संवेदनशील वीडियो सोशल मीडिया पर फैलने से रोकने का आग्रह किया। मामला लॉ छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान उठा। याचिका में सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर, कमला नगर और करोल बाग जैसे छात्र इलाकों में स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट की मांग की गई है। कोर्ट ने छात्रों की संख्या, हॉस्टल क्षमता और निजी पीजी के नियमों की जानकारी हलफनामे में मांगी है। अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।






