जन्माष्टमी: आज 5 घंटे बंद रहेगा जगन्नाथ मंदिर, क्यों भगवान जगन्नाथ निभाएंगे मां की भूमिका, क्या है परंपरा?

डिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर शुक्रवार यानी आज करीब पांच घंटे तक आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहेंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रात करीब सात बजे से मध्यरात्रि तक सार्वजनिक दर्शन स्थगित रहेगा। इस दौरान मंदिर में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी एक खास परंपरा के तहत श्रीकृष्ण जन्म की विशेष पूजा और अनुष्ठान किया जाएगा।

जन्माष्टमी पर भगवान जगन्नाथ से जुड़ी क्या खास मान्यता है?

  • पुरी की परंपरा में भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों की जननी के रूप में पूजा जाता है।
  • इनमें श्रीकृष्ण, श्रीराम और भगवान बलराम भी शामिल हैं।
  • जगन्नाथ संस्कृति के जानकारों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को महाविष्णु और सृष्टि के मूल के रूप में माना जाता है।
  • इसी मान्यता के कारण मंदिर में भगवान विष्णु के सभी दस अवतारों के जन्मदिन भी मनाए जाते हैं।

 

श्रीकृष्ण के जन्म से पहले भगवान जगन्नाथ को क्या चढ़ाया जाएगा?

जन्माष्टमी से एक रात पहले भगवान जगन्नाथ को जेउता भोग अर्पित किया जाएगा। इसे खास औषधीय भोजन माना जाता है, जिसका संबंध प्रसव पीड़ा कम करने की परंपरा से जोड़ा जाता है। जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता डॉ. भास्कर मिश्रा के अनुसार, श्रीराम नवमी और जन्माष्टमी से एक रात पहले भगवान को यह भोग अर्पित किया जाता है। यह भोग रात में मंदिर के मुख्य द्वार बंद होने से पहले लगाया जाता है।

 

मंदिर में श्रीकृष्ण जन्म के दौरान क्या होगा?

  • जगन्नाथ संस्कृति के जानकार पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा के अनुसार, जेउता भोग के बाद भगवान जगन्नाथ की विशेष आरती की जाती है।
  • मान्यता के अनुसार, उस समय भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण को जन्म देने वाली मातृ भूमिका में होते हैं।
  • इसी विशेष अनुष्ठान के कारण शुक्रवार रात करीब सात बजे से मध्यरात्रि तक आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन रोक दिए जाएंगे।
  • इस दौरान मंदिर में कृष्ण जन्म नीति संपन्न की जाएगी।
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भगवान जगन्नाथ को पुरुष और स्त्री दोनों रूपों में क्यों माना जाता है?

पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव के अनुसार, भगवान जगन्नाथ महाविष्णु हैं और उनके सभी अवतारों के सृजनकर्ता माने जाते हैं। उनकी मान्यता में भगवान जगन्नाथ पुरुष और स्त्री दोनों रूपों में पूजनीय हैं तथा उन्हें उस मूल शक्ति के रूप में देखा जाता है, जिससे पूरी सृष्टि का जन्म हुआ। इसी वजह से श्रीकृष्ण सहित भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतारों के जन्म से जुड़ी परंपराएं भी जगन्नाथ मंदिर में विशेष महत्व रखती हैं।

 

जन्माष्टमी के बाद पुरी में कौन सा उत्सव होगा?

श्रीकृष्ण जन्म से जुड़े अनुष्ठान 4 सितंबर को मंदिर में होंगे। इसके अगले दिन 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक कृष्ण लीला से जुड़े अनुष्ठानों की शुरुआत होगी। इस तरह जन्माष्टमी के दौरान कुछ समय के लिए दर्शन बंद रहने के बावजूद मंदिर में धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी।

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