MP- कोई खूबसूरत अफसर, कोई बनी फर्जी IAS तो कोई हनीट्रैप की मास्टरमाइंड…देखे इनकी कहानी

ध्य प्रदेश की तीन महिलाएं इन दिनों अलग-अलग मामलों को लेकर सुर्खियों में हैं। पहली हैं निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, जिन पर ट्रांसपोर्टर से अवैध वसूली के आरोपों के बाद कार्रवाई हुई है। दूसरी हैं तृप्ति सिंह राजपूत, जो फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को सरकारी नौकरी और अन्य काम दिलाने का झांसा देने के आरोप में गिरफ्तार हैं। वहीं तीसरी हैं चर्चित हनीट्रैप मामले की कथित सरगना श्वेता जैन, जिस पर जेल से बाहर आने के बाद नया गिरोह तैयार कर रसूखदार लोगों को हनीट्रैप में फंसाने की साजिश रचने का आरोप है। आइए जानते हैं…

पहली कहानी नेहा पच्चीसिया की
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की पचोर तहसील के एक छोटे से गांव में रहने वाले शिक्षक की बेटी नेहा पच्चीसिया ने एयर होस्टेस की नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी। 2016 में एक साथ चार परीक्षाओं में चयन के बाद उन्होंने एमपीपीएससी में 20वीं रैंक हासिल की और डीएसपी बनीं।

मध्यमवर्गीय परिवार की चार बहनों में सबसे बड़ी नेहा को एक समय मध्य प्रदेश की खूबसूरत महिला अधिकारियों में भी शुमार किया जाता था। कोरोना काल में बेहतर काम और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें पुरस्कृत भी किया था। लेकिन अब नेहा पच्चीसिया फिर सुर्खियों में हैं। ट्रांसपोर्टर से कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद कटनी एसपी ने उनके चालक को निलंबित कर दिया, जबकि नेहा के कार्यक्षेत्र से तीन थानों का प्रभार भी वापस ले लिया गया।

 

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, कटनी जिले के कुठला थाना में 19 अगस्त को दर्ज अपराध क्रमांक 738/2026 ने पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोरीं। शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने आरोप लगाया कि करीब 1.07 करोड़ रुपये मूल्य की पैतृक जमीन की रजिस्ट्री तत्कालीन सीएसपी नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों ने दबाव बनाकर कराई। आरोप है कि जमीन के बदले केवल 15 लाख रुपए का चेक दिए गए जबकि बाद में रजिस्ट्री निरस्त कर जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम दर्ज करा दी गई।

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शिकायत में यह भी कहा गया कि जहां जमीन का गाइडलाइन मूल्य 82.46 लाख रुपए था, वहीं दस्तावेजों में महज 18.20 लाख रुपये दर्शाए गए। वही मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान पहले कटनी एएसपी कमल मौर्य ने संभाली। बाद में जांच जबलपुर एएसपी अनु बेनीवाल को सौंपी गई और फिर कटनी जिले में FIR दर्ज कराई गई। जिसमें आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित कर एएसपी अंजना तिवारी को इसकी जिम्मेदारी दी गई। जांच के दौरान भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7(सी), 12 और 13 भी जोड़ी गईं, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

 

 

दूसरी कहानी तृप्ति सिंह राजपूत की
फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों को सरकारी नौकरी और सरकारी संपत्ति दिलाने का झांसा देने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत इन दिनों अशोकनगर जेल में बंद हैं। तृप्ति पर चंदेरी में चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई को गिरफ्तार किया है। जांच में कथित फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज, सीबीआई लिखा पहचान पत्र, सरकारी लेटरहेड और ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा कार मिलने की बात भी सामने आई है।

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भोपाल में 39.17 लाख की FIR
बागसेवनिया थाने में तृप्ति के खिलाफ 39.17 लाख रुपये की धोखाधड़ी की FIR दर्ज है। शिकायतकर्ता रोहित लिल्हारे का आरोप है कि तृप्ति ने खुद को ट्रेनी आईएएस और एमपीटी की एडिशनल डायरेक्टर बताया। होटल-रिसॉर्ट की संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35.30 लाख और नौकरी के लिए 3.87 लाख रुपये लिए गए। शिकायत के अनुसार, न लीज हुई और न नौकरी लगी। पैसे वापस मांगने पर केवल एक लाख रुपये ऑनलाइन लौटाए गए। बाकी 38.17 लाख रुपये नहीं लौटाए गए। इसके बाद रोहित ने पुलिस में शिकायत की।

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अब पूरे नेटवर्क की तलाश
भोपाल मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह, प्रखर सिंह और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने तृप्ति के बताए सरकारी पद की पुष्टि की थी। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि कथित ठगी में किसकी क्या भूमिका थी। नए वीडियो, कथित फर्जी दस्तावेज और अलग-अलग मामलों के सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगा रही है कि तृप्ति ने कब से फर्जी अधिकारी की पहचान बना रखी थी और कितने लोगों को प्रभावित किया। विधानसभा के वीडियो में नजर आई उसकी सहेलियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।

तीसरी कहानी श्वेता जैन की
मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामले की कथित सरगना श्वेता जैन एक बार फिर चर्चा में हैं। पुलिस के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद श्वेता ने कथित तौर पर नया गिरोह तैयार किया और हनीट्रैप पार्ट-2 की साजिश रची।

पुलिस की चार्जशीट में श्वेता जैन को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया गया है। आरोप है कि वह सागर में बैठकर गिरोह की गतिविधियां संचालित कर रही थी और इस बार निशाने पर बिल्डर, ठेकेदार और अन्य रसूखदार लोग थे। जांच के मुताबिक, इंदौर के शराब ठेकेदार पिंटू ठाकुर को जाल में फंसाकर कथित तौर पर स्पाई कैमरे से वीडियो बनाया गया और फिर एक करोड़ रुपये की मांग की गई।

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चार साल पहले भी आया था श्वेता का नाम
चार साल पहले सामने आए चर्चित हनीट्रैप मामले में भी श्वेता जैन का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। पुलिस जांच में आरोप लगा था कि श्वेता ने अपने संपर्क में आई आरती दयाल को गिरोह में शामिल किया और उसके जरिए इंदौर नगर निगम के तत्कालीन अधीक्षण यंत्री हरभजन सिंह को हनीट्रैप में फंसाया गया। बताया गया कि हरभजन सिंह ने आरती के लिए इंदौर के एक होटल में कमरा बुक कराया था। आरोप है कि वहां उनका वीडियो बनाया गया और बाद में पैसों की मांग शुरू कर दी गई। इसके बाद हरभजन सिंह ने पुलिस से शिकायत की थी। उस समय पुलिस ने इंदौर और भोपाल से हनीट्रैप गिरोह से जुड़ी चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था। यह मामला पूरे प्रदेश में काफी चर्चित रहा था। बाद में डेढ़ साल पहले हरभजन सिंह रीवा स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे।

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