हिमाचल हाईकोर्ट में बढ़ी न्यायिक ताकत, 3 नए जजों ने ली शपथ, जानें किसका कैसा रहा न्यायिक सफर

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को रविवार को तीन नए न्यायाधीश मिले। चिराग भानु सिंह ने न्यायाधीश के रूप में शपथ ली, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल ने अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। लोक भवन में  राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया भी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव केके पंत ने शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही संचालित की। राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज ने शपथ पत्रों पर राज्यपाल और नवनियुक्त न्यायाधीशों के हस्ताक्षर करवाए। समारोह में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल, हाईकोर्ट के न्यायाधीश, वरिष्ठ न्यायिक, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

चिराग भानु सिंह का लंबा न्यायिक अनुभव
चिराग भानु सिंह ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। 1994 में उन्होंने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में पंजीकरण कराया। वर्ष 2003 से उन्होंने प्रदेश सरकार के उप महाधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं। 2007 में वह अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त हुए। वह हिमाचल प्रदेश औद्योगिक न्यायाधिकरण-सह-श्रम न्यायालय के न्यायाधीश, चंबा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सरकार के प्रधान सचिव (विधि), प्रधान सचिव (लोकायुक्त एवं मानवाधिकार आयोग), राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के ओएसडी रहे। वह सुप्रीम कोर्ट में दो बार रजिस्ट्रार (न्यायिक-एक) भी रहे।

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1996 में न्यायिक सेवा में आए भूपेश शर्मा
भूपेश शर्मा ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और जुलाई 1996 में कांगड़ा में सब जज-सह-न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की। 2012 में उन्हें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पद पर पदोन्नत किया गया। वह हमीरपुर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और शिमला में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रहे। चार अक्तूबर 2024 से वह हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत थे।

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योगेश जसवाल ने 1991 में शुरू की थी वकालत
योगेश जसवाल ने 1991 में एचपीयू से एलएलबी की डिग्री हासिल की और 1991-92 में बार काउंसिल में पंजीकरण कराया। 1996 में हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए। 2013 में उच्चतर न्यायिक सेवा में पदोन्नत होने के बाद उन्होंने घुमारवीं में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश और किन्नौर, चंबा तथा कांगड़ा में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। वह श्रम न्यायालय-सह-औद्योगिक न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार और हिमाचल प्रदेश न्यायिक अकादमी के निदेशक भी रहे।

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