उत्तराखंड: पति की मौत के बाद दीपा ने आंसुओं से नहीं मेहनत से लिखी तकदीर..

Spread the love

ति की मौत के बाद सिर पर 25 लाख रुपये से अधिक का कर्ज, दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और पैतृक चार एकड़ जमीन बेचने का दबाव… हालात ऐसे थे कि किसी का भी हौसला टूट सकता था। दीपा पाठक ने हार मानने के बजाय उसी जमीन को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने डेयरी शुरू की। गायों की देखभाल और दूध बेचने से शुरुआत की। बाद में औषधीय मशरूम उत्पादन कर हालात काे मात दी।

ग्राम चुकटी देवरिया की दीपा पाठक ने बताया कि उनका विवाह वर्ष 1997 में दीपक पाठक से हुआ था। दीपक क्रिकेटर थे। खेल के दौरान गेंद लगने से उन्हें चोट लगी जिसके बाद वह कैंसर की चपेट में आ गए। लंबे उपचार के बावजूद वर्ष 2008 में उनका निधन हो गया। उस समय उनकी बेटी आठ और बेटा सात वर्ष के थे। पति के इलाज में 25 लाख रुपये से अधिक खर्च होने से परिवार पर भारी कर्ज हो गया था।

कर्जदारों ने पैतृक चार एकड़ जमीन बेचकर रकम चुकाने का दबाव बनाया लेकिन दीपा ने जमीन बेचने से इनकार कर दिया। उन्होंने तय किया कि इसी जमीन और अपनी मेहनत के बूते परिवार को संभालेंगी। इसके बाद उन्होंने डेयरी शुरू की। शुरुआत में खुद गायों का दूध निकालना सीखा और धीरे-धीरे डेयरी का विस्तार किया। आज उनके पास 15 गायें हैं और वह प्रतिदिन करीब 100 से 125 लीटर दूध बेचती हैं। संवाद

 

हालात से नहीं किया समझौता
डेयरी और मशरूम उत्पादन से उनकी सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये तक पहुंच गई है। इसी आय से उन्होंने पति के इलाज के दौरान लिया गया कर्ज चुकाया। परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के साथ दीपा ने अपने दोनों बच्चों की पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान दिया। उनकी बेटी गुरुग्राम और बेटा बेंगलुरु में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं। पति की मृत्यु के बाद अकेले परिवार संभालने वाली दीपा अब अपनी सास धनी देवी के साथ आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

औषधीय मशरूम की दिल्ली से विदेशों तक पहुंच
डेयरी के साथ आय का दूसरा जरिया तलाशते हुए दीपा ने कुछ वर्ष पहले औषधीय मशरूम का उत्पादन शुरू किया। उन्होंने गैनोडर्मा प्रजाति के मशरूम की खेती शुरू की और धीरे-धीरे इसका उत्पादन बढ़ाया। दीपा के यहां तैयार मशरूम को सुखाकर दिल्ली भेजा जाता है। वहां से इसकी आपूर्ति विदेशों में दवा निर्माण के लिए की जाती है।

और पढ़े  उत्तराखंड में कई माननीयों के वोटों पर भी आपत्तियां, किसी का नाम गलत तो किसी को विसंगति का नोटिस जारी

 

 

जिस चार एकड़ जमीन को बेचने के लिए दबाव बनाया गया था, आज उसी में धान और गेहूं की फसल लहलहा रही है। इसी जमीन पर अपनी गायों के लिए चारा भी उगाया जाता है। डेयरी और मशरूम उत्पादन से जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है।
-दीपा पाठक, ग्राम चुकटी, देवरिया, ऊधमसिंह नगर


Spread the love
  • Related Posts

    मसूरी: बारिश में बह गईं होटल कारोबारियों की उम्मीदें, सोशल मीडिया पर खबरों से बुकिंग रद्द

    Spread the love

    Spread the loveपहाड़ों की रानी मसूरी में हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बारिश का असर शहर के पर्यटन कारोबार पर भी पड़ा है। लगातार हो रही…


    Spread the love

    रुद्रप्रयाग: सड़क चौड़ीकरण के दौरान मलबा लेकर जा रहा डंपर अनियंत्रित होकर पलटा, हादसे में चालक घायल

    Spread the love

    Spread the loveगुप्तकाशी-लमगौंडी मोटरमार्ग पर एक स्कूल के ऊपर शनिवार अपराह्न सड़क चौड़ीकरण कार्य में लगा डंपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में चालक वाहन से निकलकर झाड़ियों में जा गिरा,…


    Spread the love