देश में पहली बार एचआईवी संक्रमण के ज्यादा खतरे वाले लोगों को बीमारी से बचाने के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समितियों ने इन दवाओं के निर्माण, बिक्री और क्लिनिकल ट्रायल को लेकर अहम सिफारिशें की हैं।
रिफैक्सिमिन को 400 और 550 मिलीग्राम के सैशे में बनाने और बेचने की अनुमति देने की सिफारिश की गई है। एटॉपिक डर्मेटाइटिस त्वचा की बीमारी है, जिसमें लंबे समय तक त्वचा से जुड़ी परेशानी बनी रह सकती है। इसके हल्के से मध्यम मामलों में इस्तेमाल के लिए रक्सोलिटिनिब क्रीम 1.5 फीसदी के निर्माण और बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की गई है। यह क्रीम गैर-प्रतिरक्षा-कमजोर वयस्क मरीजों में इस्तेमाल के लिए प्रस्तावित है।






