अयोध्या- मणि पर्वत मेले के साथ कंचन भवन में झूला उत्सव का हुआ भव्य शुभारंभ

 

 

रामनगरी की प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले कंचन भवन में मणि पर्वत मेले के दिन से भगवान के दिव्य झूला उत्सव की परंपरा का विधिवत शुभारंभ हुआ। भगवान को भव्य एवं मनोहारी ढंग से सजाए गए अलौकिक झूले पर विराजमान कराया गया। रात्रि आठ बजे भगवान की आरती के पश्चात झूला उत्सव प्रारंभ हुआ, जो देर रात तक श्रद्धा, भक्ति और संगीत की त्रिवेणी के बीच चलता रहा।
झूला उत्सव का सबसे भावपूर्ण दृश्य उस समय देखने को मिला, जब कंचन भवन पीठाधीश्वर महंत विजय दास महाराज स्वयं उत्सव में उपस्थित हुए और अपने कर-कमलों से भगवान को झूला विहार कराया। भगवान के झूला विहार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में संत, भक्त और श्रद्धालु उपस्थित रहे। झूले पर विराजमान भगवान की मनोहारी छवि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक आभा से भर दिया।
भक्ति संगीत में देर रात तक डूबी रही रामनगरी
कंचन भवन के झूला उत्सव में सुदूर प्रांतों एवं विभिन्न जनपदों से ख्यातिलब्ध गायक और वादक कलाकार पहुंचे। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर अपनी कला की प्रस्तुति दे चुके कलाकारों ने भगवान के श्रीचरणों में भक्ति संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियां अर्पित कीं।
भजन और संगीत की मधुर स्वर लहरियों के बीच संत और श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान की आराधना करते हुए स्वयं को कृतार्थ माना। देर रात तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे।
सेवा और संस्कारों की निरंतर साधना है कंचन भवन
पीठाधीश्वर महंत विजय दास महाराज की अध्यक्षता में कंचन भवन में वर्षभर सेवा एवं धार्मिक गतिविधियों की निरंतर परंपरा संचालित होती है। यहां गौ सेवा, संत सेवा, विद्यार्थियों की सेवा, मनीषियों एवं विद्वानों का सम्मान तथा अतिथि सेवा को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक आयोजनों के साथ समय-समय पर विभिन्न उत्सव, महोत्सव, सम्मान समारोह और भंडारों का भी आयोजन होता रहता है।
कंचन भवन के व्यवस्थापन में रवि प्रताप राय की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। झूला उत्सव के आयोजन में पंकज कुमार सिंह आयोजक एवं अनुभव सिंह सहित सहयोगियों ने व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में योगदान दिया।
अयोध्या की जीवंत परंपरा का प्रतीक है झूला उत्सव
कंचन भवन का झूला उत्सव भगवान के प्रति भक्ति और अयोध्या की सनातन सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करता है। मणि पर्वत मेले के साथ शुरू होने वाला यह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद का विशेष अवसर होता है। भगवान के झूला विहार, संतों की उपस्थिति और कलाकारों की भक्ति प्रस्तुतियों ने कंचन भवन के पूरे वातावरण को भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर कर दिया।

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