कटिहार के हसनगंज की कक्षा चार की छात्रा लक्ष्मी जन्म से दोनों हाथों से वंचित हैं, लेकिन उन्होंने अपनी शारीरिक कमी को पढ़ाई की राह में बाधा नहीं बनने दिया। लक्ष्मी पैरों से लिखकर पढ़ाई करती हैं और आगे चलकर शिक्षिका बनने का सपना देखती हैं। मजदूर परिवार से आने वाली लक्ष्मी को अब तक सरकारी स्तर पर कोई विशेष मदद नहीं मिली है, जबकि स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाएं पढ़ाई में उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं।
रोज स्कूल पहुंचकर पैरों से लिखती हैं लक्ष्मी
लक्ष्मी हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतौरिया में कक्षा चार में पढ़ती हैं। वह रोजाना स्कूल पहुंचती हैं और अपने पैरों से लिखकर पढ़ाई करती हैं। पढ़ाई को लेकर उनका उत्साह देखते ही बनता है। लक्ष्मी का सपना बड़ा है। वह आगे पढ़-लिखकर शिक्षिका बनना चाहती हैं। मुश्किलें उनके कदम रोकने की कोशिश जरूर करती हैं, लेकिन लक्ष्मी का हौसला लगातार उन्हें आगे बढ़ा रहा है।
बेटी को बोझ नहीं, लक्ष्मी मानकर पाला
लक्ष्मी के जन्म के बाद परिवार को कई तरह की बातें सुननी पड़ीं। कुछ लोगों ने तो बच्ची को छोड़ देने तक की सलाह दी थी, लेकिन उसके माता-पिता ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपनी बेटी को कभी बोझ नहीं माना और प्यार से उसका नाम भी लक्ष्मी रखा। पेशे से मजदूर पिता रामदेव यादव और गृहिणी मां रेणु देवी खुद अनपढ़ हैं। इसके बावजूद दोनों मजदूरी कर अपनी तीन बेटियों और एक बेटे का पालन-पोषण कर रहे हैं। माता-पिता अपनी बेटी को रोज स्कूल तक लेकर आते हैं, ताकि शिक्षा के जरिए उसकी जिंदगी बेहतर हो सके।





