सिस्टम के खिलाफ लड़ने वाले भरत तिवारी का फर्जी एनकाउंटर हुआ था। एक तरह से यह बात बिहार सरकार ने स्वीकार कर ली है। पहले इस कांड के प्रथम दृष्ट्या दोषियों को प्रतीकात्मक सजा दी गई। अब राज्य की सम्राट चौधरी सरकार ने न्यायिक जांच में बिहार पुलिस के अपराध की पुष्टि के बाद बड़ा एलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को खुद एलान किया कि दिवंगत भरत तिवारी के परिवारजनों को आर्थिक मदद दी जाएगी। इसके साथ ही उनके एक परिजन को सरकारी नौकरी भी देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।
इससे पहले 24 जुलाई को सीएम सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की थी। उन्हें इस मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। तब उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था कि स्वर्गीय भरत तिवारी जी के परिवार को न्याय मिलेगा। तब यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही थी।
आरोपी पुलिसकर्मी को भी गिरफ्तार कर लिया गया था
इससे पहले 31 जुलाई को भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया है। आरा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राज ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मामले में शामिल पुलिसकर्मी अक्षय को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसपी ने बताया कि यह कार्रवाई आरा पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की संयुक्त टीम ने की है। फिलहाल आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है।
17 जून को हुआ था एनकाउंटर
गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर जिले में 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। वहीं, पुलिस का दावा था कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई।





