राजनीति में हलचल: जगतार हवारा को पैरोल की सिफारिश कर आप ने चलाया चुनावी बाण, क्या होगा असर?

Spread the love

पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंथक मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

मान ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर हवारा की मां की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर पैरोल पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है।

पंथक राजनीति का संवेदनशील मुद्दा

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हवारा की पैरोल का मामला लंबे समय से पंजाब की पंथक राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है। फरवरी में हवारा कलां में आयोजित पंथक सभा में भी उनकी बीमार मां से मुलाकात के लिए पैरोल की मांग प्रमुखता से उठी थी और सरकार को इस मामले में समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई थी।

जुलाई में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हवारा की पैरोल याचिका पर समयबद्ध प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मंडोली जेल के अधीक्षक और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर नियमों के अनुसार निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया है।

 

अकाली दल असहज

मान के पत्र ने सबसे ज्यादा असहज स्थिति शिरोमणि अकाली दल के सामने पैदा कर दी है। बंदी सिंहों की रिहाई और सिख कैदियों के मुद्दे पर अकाली दल लंबे समय से अपनी पंथक पहचान को मजबूत करता रहा है।

और पढ़े  अब पाकिस्तानी ड्रोन पकड़वाने पर मिलेगा बड़ा इनाम: पंजाब पुलिस का एलान, नशा तस्करों पर लगेगी लगाम

यानी अकाली दल के सामने एक ऐसी स्थिति बन गई है जिसमें समर्थन करे तो आम आदमी पार्टी को पंथक मुद्दे पर श्रेय मिल सकता है और विरोध करे तो पंथक मतदाताओं के बीच गलत संदेश जाने का खतरा है।

भाजपा की भूमिका रहेगी अहम

इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा के सामने एक तरफ पंजाब की पंथक संवेदनशीलता है तो दूसरी तरफ बेअंत सिंह हत्याकांड से जुड़ा भावनात्मक और राजनीतिक इतिहास। मुख्यमंत्री मान के पत्र के बाद अब निर्णय की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। यदि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत पैरोल मंजूर होती है तो आम आदमी पार्टी इसे मानवीय पहल के तौर पर पेश कर सकती है।

वहीं यदि पैरोल नहीं मिलती तो राजनीतिक बहस का रुख इस सवाल की ओर जा सकता है कि बीमार मां से मिलने के मानवीय आग्रह को क्यों स्वीकार नहीं किया गया। 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


Spread the love
  • Related Posts

    आज पंजाब कैबिनेट की बैठक- कई अहम प्रस्तावों पर लगेगी मुहर, CM भगवंत मान करेंगे अध्यक्षता

    Spread the love

    Spread the loveमुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक होगी। बैठक पंजाब विधानसभा सचिवालय के कमेटी रूम में होगी। मुख्य सचिव की तरफ से इस संबंध…


    Spread the love

    अब पाकिस्तानी ड्रोन पकड़वाने पर मिलेगा बड़ा इनाम: पंजाब पुलिस का एलान, नशा तस्करों पर लगेगी लगाम

    Spread the love

    Spread the loveसरहद पर हेरोइन-असलहा की खेप से लदे पाकिस्तानी ड्रोनों की भरमार को देखते हुए पंजाब पुलिस और बीएसएफ ने सीमावर्ती गांवों में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन तेज कर…


    Spread the love