विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच बने नए सुरक्षा ढांचे के बाद या इन देशों के गठजोड़ के दबाव में इस्राइल और भारत के बीच रक्षा समझौते की पहल जैसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दबाव या तीन देशों के गठबंधन के कारण इस्राइल-भारत डील की तमाम खबरों और दावों को ‘फेक न्यूज’ करार दिया। यह दावा तुर्किये के मीडिया आउटलेट स्ट्रैटुर्का से सामने आया था और बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर के बाद आई है। इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और संयुक्त सुरक्षा को मजबूत करना है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समझौते का लक्ष्य सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होने को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते में अलग-अलग क्षेत्रों में रक्षा सहयोग बढ़ाने का भी प्रावधान है।
क्या भारत इस त्रिपक्षीय समझौते पर नजर रख रहा है?
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस त्रिपक्षीय समझौते पर कहा कि नई दिल्ली घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही है। साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और आगे की जानकारी साझा करता रहेगा।
क्या मोदी-नेतन्याहू की बातचीत का रक्षा समझौते से कोई संबंध है?
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच गुरुवार को फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-इस्राइल विशेष रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की।






