पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शशि पांजा की लगातार दूसरे दिन एनसीपीआई सांसद काकली घोष दस्तीदार के क्लिनिक पहुंचने से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। हालांकि दोनों नेताओं ने इन मुलाकातों को पूरी तरह पेशेवर बताया है।
एनसीपीआई सांसद काकली घोष दस्तीदार ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि शशि पांजा से उनका रिश्ता तीन दशक से भी पुराना है और इसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन से प्रशिक्षण लेकर लौटने के बाद शशि पांजा उनकी शुरुआती छात्राओं में थीं और पिछले 30-35 वर्षों से उनके संस्थान से जुड़ी हैं। दोनों नियमित रूप से मरीजों के इलाज और चिकित्सा कार्यों के सिलसिले में मिलती हैं।
काकली घोष ने कहा कि शशि पांजा की हाल की राजनीतिक सक्रियता या टीएमसी की स्थिति को लेकर उनके बीच कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने अपने बेटे की सोशल मीडिया पोस्ट पर भी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि किसी और के अकाउंट पर की गई पोस्ट पर वह कुछ नहीं कह सकतीं।
TMC में टूट के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में बड़ा विभाजन हुआ था। पार्टी के 20 लोकसभा सांसद अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हो गए, जो अब केंद्र में भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए का सहयोगी दल है। विधानसभा में भी टीएमसी दो गुटों में बंट गई थी। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरा रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में सक्रिय है।
शशि पांजा की कम होती सक्रियता बनी चर्चा का विषय
संगठनात्मक विभाजन के बाद से शशि पांजा सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों में कम दिखाई दी हैं। हाल ही में ममता बनर्जी गुट के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने भी कहा था कि विधानसभा चुनाव के बाद से शशि पांजा पार्टी गतिविधियों से लगभग गायब हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि चाहे ये मुलाकातें दो डॉक्टरों के बीच हों या इनके पीछे कोई राजनीतिक कारण हो, इसका जवाब भविष्य ही देगा।
शशि पांजा और काकली घोष दस्तीदार कभी ममता बनर्जी की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में गिनी जाती थीं। समय के साथ काकली घोष एनसीपीआई में शामिल हो गईं, जबकि चंद्रिमा भट्टाचार्य और कृष्णा चक्रवर्ती भी ममता गुट से अलग हो चुकी हैं। ऐसे में शशि पांजा का बार-बार काकली घोष से मिलना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







