मध्य प्रदेश में करीब नौ दिन से थमा तेज बारिश का दौर अब फिर लौटने की तैयारी में है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को बालाघाट और डिंडोरी में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा 31 जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के ऊपर तीन अलग-अलग मौसमीय तंत्र सक्रिय हैं। 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश की गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
प्रदेश में पिछले नौ दिनों से कहीं भी व्यापक और तेज बारिश नहीं हुई। इसका असर मानसूनी आंकड़ों पर भी दिख रहा है। अब तक मध्य प्रदेश में 243.3 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस समय तक सामान्य बारिश 281.3 मिमी होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश अभी भी 13 प्रतिशत बारिश की कमी से जूझ रहा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति ज्यादा खराब है, जहां सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी हिस्से में भी बारिश का आंकड़ा सामान्य से 2 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।
35 जिलों में बारिश सामान्य से कम
प्रदेश के 35 जिले अभी भी सामान्य से कम बारिश वाले दायरे में हैं। इनमें पूर्वी और आदिवासी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। दूसरी तरफ भोपाल, इंदौर, देवास, हरदा, उज्जैन, राजगढ़, सीहोर, ग्वालियर समेत 20 जिलों में बारिश की स्थिति सामान्य या उससे बेहतर बनी हुई है।
अब तक सबसे ज्यादा बारिश देवास में दर्ज हुई है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक पानी गिर चुका है और कुल बारिश 18 इंच तक पहुंच गई है। हरदा में 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14 इंच तथा भोपाल में 13.1 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसके विपरीत आलीराजपुर सबसे सूखा जिला बना हुआ है, जहां अब तक केवल करीब सवा दो इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से 74 प्रतिशत कम है।
विशेषज्ञ बोले- अगले कुछ दिन होंगे अहम
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार प्रदेश में मानसून पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है, लेकिन बारिश की कमी कृषि और जल भंडारण के लिए चिंता का विषय है। यदि बंगाल की खाड़ी से बन रहा नया कम दबाव का क्षेत्र मजबूत हुआ तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में फिर अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।








