प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध बांग्लादेशी व रोहिंग्या को भारत में बसाने में जुटे नेटवर्क का खुलासा किया है। ईडी ने इस नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में छापे मारे। यह नेटवर्क विदेशों से मिले पैसे का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने और उनकी आजीविका के इंतजाम करने में कर रहा था। इस नेटवर्क के तार आतंकी फंडिंग से भी जुड़े होने की आशंका है।
घुसपैठियों के मददगार नेटवर्क के साथ कुछ ट्रस्टों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रस्टों के माध्यम से छोटे-छोटे हिस्सों में बड़ी रकम का लेनदेन किया गया। कई बैंक खातों और कथित रेंट अकाउंट के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
यूपी एटीएस की प्राथमिकी पर केंद्रित है मामला
ईडी की ओर से 2024 में दर्ज मामला उत्तर प्रदेश आतंकवाद-रोधी दस्ते (यूपी-एटीएस) की प्राथमिकी पर आधारित है। प्राथमिकी ऐसे संगठित गिरोह पर केंद्रित है, जिसपर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में गैरकानूनी तरीके से दाखिल कराने, उनके लिए आधार, पैन और पासपोर्ट जैसे जाली पहचान दस्तावेज बनवाने तथा देश के अलग-अलग हिस्सों में बसने में मदद करने का आरोप है।






