देश के सहकारिता आंदोलन को नया जीवन देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक नीतिगत पहल की है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य समारोह में घोषणा की कि देश में सहकारी समितियों के विकास को तेज करने के लिए जल्द ही एक नई सहकारी लाइफ इंश्योरेंस (जीवन बीमा) कंपनी का गठन किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने बताया कि देश में सहकारी मॉडल पर आधारित भारत टैक्सी का कामकाज बेहद शानदार रहा है और आगामी दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों में करने की ठोस तैयारी है। इसी मॉडल की तर्ज पर, बीमा क्षेत्र में सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक स्वतंत्र सहकारी जीवन बीमा कंपनी स्थापित की जाएगी।
ग्रामीण स्तर पर पैक्स (पीएसीएस) के डिजिटलीकरण और क्षमता निर्माण के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं?
सहकारिता क्षेत्र को पेशेवर, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए मंत्रालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- 50,000 ई-पैक्स (ई-पीएसीएस) का शुभारंभ: ग्रामीण स्तर की वित्तीय रीढ़ कही जाने वाली 50,000 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पीएसीएस) को डिजिटल तकनीक से लैस कर ई-पैक्स (ई-पीएसीएस) में परिवर्तित कर दिया गया है। यह जमीनी स्तर के संस्थानों के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
- त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना: सहकारिता क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए गुजरात के आणंद में ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जो पेशेवर प्रशिक्षण सुनिश्चित करेगा।
कृषि बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किन बड़ी परियोजनाओं का अनावरण किया गया है?
किसानों और छोटे उत्पादकों के लिए भंडारण और बेहतर सुविधाओं के उद्देश्य से कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया:
- अनाज भंडारण क्षमता का विस्तार: कार्यक्रम के दौरान 75,000 टन की कुल क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण किया गया, 85 नए गोदामों का उद्घाटन हुआ, तथा 47 अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया गया।
- सहकार वन और टिश्यू कल्चर लैब: अमूल और एनसीसीएफ द्वारा सहकार वन का भूमि पूजन किया गया। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन हुआ। साथ ही, बीज प्रणालियों को मजबूत करने के लिए बीबीएसएसएल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
सहकारिता नीति को लेकर राज्यों की चिंताओं और आगामी विकास का क्या दृष्टिकोण है?
सहकारिता मंत्रालय के संघीय ढांचे में हस्तक्षेप की शुरुआती आशंकाओं को खारिज करते हुए अमित शाह ने साफ किया कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी कांग्रेस शासित राज्य ने केंद्रीय हस्तक्षेप की शिकायत नहीं की है, क्योंकि यह मंत्रालय राज्यों के मामलों में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण के लिए है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की डेयरी सहकारी प्रणाली का विस्तार किया जा रहा है क्योंकि वर्तमान में डेयरी क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा असंगठित है, जिसे अधिक संगठित बनाया जाएगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य सहकार से समृद्धि के दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सहकारी क्षेत्र को एक मजबूत आधारशिला बनाना है।






