पश्चिम एशिया संघर्ष खत्म- ईरान-US जंग रोकने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर,समझौते पर किए हस्ताक्षर

 

पश्चिम एशिया में 111 दिन से जारी तनाव खत्म होने के ठोस संकेत मिले हैं। जी7 देशों के सम्मेलन के लिए फ्रांस दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसिसी समकक्ष मैक्रों की मौजूदगी में वर्साय में जंग खत्म करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।

ईरान की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए। हालांकि, पेजेशकियन तेहरान में ही मौजूद रहे और इस प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से पूरा किया गया। जिस समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, इसमें 14 बिंदु शामिल हैं।

 

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने क्या कहा?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस कदम का स्वागत करते हुए इसे स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम बताया है। इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापारिक जहाजों के लिए फिर से खोला जाएगा। इससे दुनिया भर में तेल और ऊर्जा की कीमतों में कमी आने और वैश्विक बाजार को राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।

 

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
इसको लेकर, व्हाइट हाउस ने एक वीडियो भी जारी किया है। इसमें ट्रंप को मैक्रों के साथ बैठकर दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस 14-सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए। पेजेशकियन ने वर्चुअली यानी ऑनलाइन माध्यम से अपने हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच दुश्मनी को खत्म करना है। यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। ओमान और कुछ अन्य देशों ने इस बातचीत में मदद की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इस समझौते के पूरा होने की पुष्टि की है।

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समझौते की मुख्य बातें-
इस 14-सूत्रीय समझौते में कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सबसे पहले, दोनों देश लेबनान सहित सभी सैन्य अभियानों को तुरंत रोक देंगे। अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और पूर्ण समझौता करने की प्रक्रिया शुरू होगी। अमेरिका अपनी नौसेना की नाकेबंदी हटा लेगा। इससे व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलने का रास्ता मिलेगा।

समझौते में आर्थिक मोर्चे पर ईरान को बड़ी राहत दी गई है। उस पर लगी पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। ईरान के जो पैसे विदेशों में रुके हुए थे, उन्हें वापस किया जाएगा। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के कार्यक्रम में सहयोग करेगा।

इस समझौते में यह भी कहा गया है कि, परमाणु मुद्दे पर ईरान ने फिर से भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान के पास मौजूद यूरेनियम के भंडार की जांच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता एक ढांचे की तरह काम करेगा, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार आएगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी यह एक अच्छी खबर है।

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