राजधानी शिमला में लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव के कारण शहरवासियों को हर रोज ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। ढाई लाख आबादी वाले शिमला शहर में रोजाना 35 से 40 हजार वाहन बाहर से आ रहे हैं। पर्यटन सीजन में यह संख्या और बढ़ जाती है। इससे हर रोज जाम लग रहा है जिससे अब हिल्स क्वीन की रफ्तार हांफने लगी है।
पर्यटन सीजन में शिमला में हर महीने सात लाख तक पर्यटक पहुंच रहे हैं। शहर में रोजाना पर्यटकों समेत दूसरे जिलों से एक से डेढ़ लाख लोग पहुंच रहे हैं। सड़कों पर वाहनों के बढ़ते बोझ, लाखों की संख्या में पहुंच रहे लोगों से हिल्स क्वीन शिमला हांफने लगी है। 10 मिनट के सफर में लोगों को ट्रैफिक जाम के कारण एक घंटे तक का समय लग रहा है। सर्कुलर रोड पर मंगलवार को भी दिनभर लोगों को जाम से परेशान होना पड़ा। पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून के पंद्रह दिन में ही शहर में पांच लाख वाहनों ने प्रवेश किया है।
पार्किंग की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से सड़कों के किनारे वाहन खड़े हो रहे हैं जिससे स्थिति और खराब हो रही है। इसके अलावा दूसरे जिलों से उपचार, नौकरी, स्कूल आदि के लिए भी रोजाना हजारों लोग शहर में पहुंचते हैं। इथोपिया की बुले होरा विश्वविद्यालय में भूगोल एवं पर्यावरण अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर अजितेश सिंह चंदेल के हाल ही में किए शोध के मुताबिक वाहनों के अधिक दबाव के कारण शहर की 70 फीसदी आबादी को हर रोज 45 मिनट तक ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। इनका जियोस्टेटिकल एनालिसिस ऑफ ट्रैफिक कंजेशन एंड अडेप्टिव स्मार्ट अर्बन मोबिलिटी सॉल्यूशन इन शिमला, अ हिमालयन माउंटेन सिटी नाम से शोध पत्र प्रतिष्ठित जर्नल डिस्कवर सस्टेनेबिलिटी में प्रकाशित हुआ है।









