ईरान ने मंगलवार को कहा कि उसके परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों में राहत को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत इस सप्ताह के अंत तक शुरू होने की संभावना है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
अधिकारियों के अनुसार, एक अंतिम समझौते पर बातचीत उस 60 दिन की समय-सीमा के भीतर होगी, जो अमेरिका-इस्राइल के हमलों से शुरू हुए करीब चार महीने के युद्ध को समाप्त करने के लिए बने समझौता ज्ञापन के औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने के बाद शुरू होगी।
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका-ईरान समझौते पर शुक्रवार (19 जून) को स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिजॉर्ट में हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह स्थल मध्य स्विट्जरलैंड के ल्यूसर्न के पास पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां पहुंचना कठिन है और इसलिए सुरक्षा आसान रहती है। स्विस विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस स्थान का प्रस्ताव पाकिस्तानी और कतर के मध्यस्थों के साथ-साथ अमेरिका और ईरान की ओर से भी दिया गया था।
हालिया घटनाक्रम पर एक नजर
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लेबनान में की गई कार्रवाई पर नाराजगी जता ई। ट्रंप ने कहाकि उन्हें और अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में जब्त की गई ईरानी संपत्तियों की वापसी, प्रतिबंधों में राहत और लेबनान से इस्राइली सेना की वापसी शामिल होनी चाहिए।
- ईरान की सेना ने आरोप लगाया कि इस्राइल ने पिछले दो दिनों में दक्षिणी लेबनान में 84 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया है। ईरानी सेना ने आगे हमले जारी रहने पर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।
- इस्राइली सेना के हमलों में दक्षिणी लेबनान के नबातिये क्षेत्र में कम से चार लोगों की मौत हुई है, जिनमें वाहनों पर किए गए ड्रोन हमले भी शामिल हैं।
- जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि जी7 देश शांति बनाए रखने के मुद्दे पर एकजुट हैं और जर्मनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को निकालने के लिए नौकाएं पहले ही भेज दी हैं।
- इस्राइल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच ने 1997 के हेब्रोन समझौते को रद्द करने का दावा किया है, जिससे कब्जे वाले वेस्ट बैंक के सबसे बड़े शहर हेब्रोन में निर्माण परियोजनाओं पर फलस्तीनी निकाय का अधिकार प्रभावित हो सकता है।
अमेरिका से संघर्ष खत्म करने के लिए इस्राइल को लेबनान छोड़ना होगा : ईरान
ईरान के शीर्ष राजनयिक और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मंगलवार को साफतौर पर कहा कि अमेरिका से युद्ध खत्म करने वाले समझौते के तहत इस्राइल को लेबनान से भी अपनी सेना हटानी ही होगी। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि समझौते में बहुत स्पष्ट है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा। हालांकि इस्राइल के लेबनान में अपनी सेना रखने के चलते समझौते की शर्तों पर असहमति से युद्धविराम पर सवाल उठ रहे हैं।
अराघची ने कहा, दक्षिणी लेबनान पर इस्राइली कब्जा जारी रहना अमेरिका-ईरान समझौते (एमओयू) का उल्लंघन माना जाएगा। वह बोले, लेबनान में युद्ध का अंत, पूरे युद्ध के अंत का एक अभिन्न अंग है। अमेरिका ने यह नहीं कहा है कि लेबनान अंतिम समझौते का हिस्सा है या नहीं। लेकिन अराघची का बयान युद्ध खत्म करने के समझौते के बारे में इस्राइली अधिकारियों के बयानों से मेल नहीं खाता है। इस्राइल इस समझौते का पक्षकार नहीं है। लेकिन उसने साफ कर दिया है कि वह लेबनान से अपनी सेना को फिलहाल वापस नहीं बुलाएगा। हालांकि ट्रंप के दबाव में नेतन्याहू के सुर कुछ नरम हुए हैं। दरअसल, इस्राइल में नेतन्याहू ईरान युद्ध को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैं। ऐसे में वह लेबनान में संघर्ष जारी रखकर खुद का राजनीतिक बचाव भी करने की रणनीति अपनाी रहे हैं।
अब तेल बेच सकेगा ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होते ही तेहरान को तेल और ईंधन की बिक्री शुरू करने की अनुमति मिल जाएगी। ईरानी तेल बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही प्रभावी हो जाएगी। इसके तहत तेल निर्यात को सुगम बनाने के लिए बैंकिंग, परिवहन और बीमा जैसी सेवाओं पर भी राहत दी जाएगी।एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने मंगलवार को यह भी कहा कि यह प्रदर्शन-आधारित समझौता है। इसी बीच समझौते के ढांचे में 300 अरब डॉलर के एक निजी निवेश फंड का भी प्रावधान किया गया है। रॉयटर्स को एक सूत्र ने बताया कि इस राशि में आधे से अधिक के लिए पहले ही प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं। यह फंड ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, विनिर्माण और परिवहन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा।
ट्रंप को समझने के लिए ईरानी वार्ता में थे मनोवैज्ञानिक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पल में तोला, पल में माशा वाले स्वभाव से दुनिया में हर कोई वाकिफ है। वह अचानक कोई वादा करते हैं और थोड़ी ही देर में उससे पलट भी जाते हैं। ईरान ने इसे ही ध्यान में रखकर अमेरिका के साथ परोक्ष बातचीत के दौरान अनूठी तरकीब अपनाई और मनोविज्ञानियों को वार्ता का हिस्सा बनाया। दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों ने न केवल ट्रंप के व्यवहार का गंभीरता से आकलन किया बल्कि ईरानी टीम को यह सलाह भी दी कि उन्हें किस तरह के संदेश भेजे जाएं। एक ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी वार्ता से जुड़े रहे एक ईरानी अधिकारी के हवाले से दी गई है। ड्रॉप साइट की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की द्विपक्षीय बातचीत के बाद तेहरान ने अपने सलाहकार दल में दो वरिष्ठ मनोवैज्ञानिकों को शामिल किया। इनका काम ईरानी वार्ताकारों को ट्रंप के व्यवहार का आकलन करने में मदद करना था। साथ ही, वे ऐसे संदेश तैयार कर रहे थे जिन्हें क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए ट्रंप तक पहुंचाया जा सके।









