टीएमसी में बड़ी टूट: ओम बिरला से मुलाकात के बाद काकोली घोष का एलान- त्रिपुरा की NCP में होगा बागी गुट का विलय

Spread the love

 

तृणमूल कांग्रेस में भारी बगावत हो गई है। पार्टी के भीतर की कलह अब संसद तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी सांसदों ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने त्रिपुरा की ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी’ के साथ विलय का एलान कर दिया है। बागी सांसदों ने यह कदम दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए उठाया है। इस फैसले से अपनी सांसदी बचाने की रणनीति तैयार की गई है। इस बड़े राजनीतिक धमाके से दिल्ली से लेकर कोलकाता तक की राजनीति गरमा गई है।

काकोली घोष ने दी विलय की जानकारी
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बागी टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि एआईटीसी से चुने गए हम बीस सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और अलग बैठने का अनुरोध करते हुए एक पत्र सौंपा। ये बीस सांसद हमारी कुल संख्या का दो-तिहाई से ज्यादा हिस्सा हैं। हम नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी में विलय कर रहे हैं। आगे चलकर, हम देश के लिए काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एनडीए के साथ मिलकर काम करेंगे। सुदीप बंदोपाध्याय ने क्या कहा? 
सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि हम नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय करेंगे। यह एक क्षेत्रीय पार्टी है। नियम यही है। जब आप पार्टी के 2/3 सदस्यों के साथ अलग होते हैं, तो आप पहले ही दिन उस पार्टी का नाम नहीं मांग सकते। जुलाई में, हम तृणमूल का नाम हमें देने की मांग करेंगे क्योंकि हमारे पास तृणमूल का 2/3 बहुमत है। फिर कोर्ट तय करेगा।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ अपनी मुलाकात पर उन्होंने कहा कि ओम बिरला ने सभी हस्ताक्षरों की पुष्टि की। 20 हस्ताक्षर थे। अब यह 2/3 है। टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और  शत्रुघ्न सिन्हा के बारे में उन्होंने कहा कि बिहार के लोग बंगाल की पार्टी को ज़्यादा समर्थन देते हैं।

और पढ़े  ईरान-अमेरिका डील पर PM मोदी का पहला बयान, कहा- दोनों देशों के बीच टिकाऊ समझौते की उम्मीद

नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय क्यों? 
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी मुख्य रूप से त्रिपुरा आधारित एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है। पूर्वोत्तर के राज्यों, विशेषकर त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में इस पार्टी का राजनीतिक आधार माना जाता है। यह कोई बहुत बड़ी या राष्ट्रीय स्तर की मुख्यधारा की पार्टी नहीं है, बल्कि एक छोटी और कम चर्चित पार्टी है।

टीएमसी के बागी सांसदों ने दलबदल विरोधी कानून की कानूनी अड़चनों से पार पाने के लिए बहुत सोच-समझकर इस पार्टी को चुना है। चूंकि संसद के नियमों के मुताबिक सदन में सीधे किसी अलग गुट को मान्यता नहीं मिल सकती और ऐसा करने पर सांसदी जाने का खतरा रहता है, इसलिए सदस्यता बचाने के लिए किसी मूल दल के साथ विलय करना कानूनी रूप से अनिवार्य था। इस विलय के बाद यह बागी गुट एक नए तकनीकी और कानूनी ढांचे के साथ केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को अपना समर्थन सौंप देगा।

ममता बनर्जी कैंप का पलटवार
जैसे ही बगावत की खबर फैली, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी ने भी जवाबी कानूनी कार्रवाई तेज कर दी। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भेजा। कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने इस पत्र को व्यक्तिगत रूप से स्पीकर को सौंपा।


Spread the love
  • Related Posts

    ईरान-अमेरिका डील पर PM मोदी का पहला बयान, कहा- दोनों देशों के बीच टिकाऊ समझौते की उम्मीद

    Spread the love

    Spread the loveपीएम मोदी ने अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते के एलान पर प्रतिक्रिया देते हुए इसका स्वागत किया और कहा कि उम्मीद है कि इससे दुनिया में स्थिरता आएगी।…


    Spread the love

    Weather- दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश से बदला मौसम का मिजाज, लोगों को मिली गर्मी से राहत

    Spread the love

    Spread the loveसोमवार की सुबह दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने करवट ली, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। गुरुग्राम सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई इलाकों में सुबह-सुबह हुई…


    Spread the love