अयोध्या: सच्चिदानंद पांडे का परमहंस आचार्य के आरोपों पर कड़ा पलटवार

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गतगुरु परमहंस आचार्य द्वारा लगाए गए आरोपों पर सच्चिदानंद पांडे ने पहली बार विस्तृत चुप्पी तोड़ते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास मिशन को बाधित करने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। फोन पर हुई बातचीत में सच्चिदानंद पांडे ने स्पष्ट किया कि उन पर लगाए गए पैसे की मांग के सभी आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और निराधार हैं। उन्होंने अत्यंत दुख के साथ कहा कि एक संत होने के बावजूद परमहंस आचार्य का इस तरह असत्य बोलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पांडे ने दावा किया कि जब से उन्होंने प्रदेश और राष्ट्र के विकास के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया है, तब से ही कुछ लोग मेरी छवि को धूमिल कर मुझे भारतीय जनता पार्टी से विचलित करने का षड्यंत्र रच रहे हैं, लेकिन ऐसे मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।विवाद की असली वजह का खुलासा करते हुए सच्चिदानंद पांडे ने बताया कि यह पूरा मामला राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि परमहंस आचार्य की नजर रायबरेली सीट से चुनाव लड़ने पर थी और मैंने ही उन्हें भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलवाई थी। असली विवाद की शुरुआत तब हुई जब उनकी अर्टिगा कार की डिमांड को मेरे द्वारा पूरा नहीं किया गया। उन्होंने विस्तार से बताया कि महाराज जी के पास कहीं से ट्रस्ट का पैसा आया था जिसे उन्होंने स्वयं ही जबरदस्ती मेरे खाते में डलवा दिया और यह कहा कि इस पैसे को अच्छे सामाजिक कामों में, मेरे बैनर-पोस्टर के साथ लगाकर खर्च करना। मैंने उसी समय उन्हें आगाह किया था कि मैं एक राजनीतिक व्यक्ति हूँ, यदि आपके साथ ऐसे पोस्टर डालूंगा तो अनावश्यक विवाद उत्पन्न होगा। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि तुम मेरे साथ पोस्ट डालो, कुछ नहीं होगा।सच्चिदानंद पांडे ने आगे कहा कि जब मुझे उनकी मंशा धीरे-धीरे समझ में आने लगी, तो मैंने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसके बाद ही उन्होंने मेरी छवि खराब करने के लिए मुकदमा दर्ज करने जैसा कदम उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोप लगाने से कोई दोषी सिद्ध नहीं हो जाता, देश में न्यायालय है जहाँ हर चीज की निष्पक्ष विवेचना होगी और जब साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। पांडे ने कहा कि अब तक मैंने संतों का सम्मान करते हुए संयम बरता, लेकिन अब हर बात सार्वजनिक की जाएगी क्योंकि धीरे-धीरे मैं समझ गया हूँ कि सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी। उन्होंने यह भी कहा कि रही गाड़ी की बात, तो उसे मैं पूरा नहीं कर पाया, लेकिन यदि उन्हें धन की आवश्यकता है, तो मैं दो नहीं चार लाख रुपये देने को भी तैयार हूँ। अंत में उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि मेरा वक्त थोड़ा खराब हो सकता है, लेकिन मुझे ईश्वर पर पूर्ण विश्वास है और जो लोग मुझे करीब से जानते हैं, वे सच्चाई से वाकिफ हैं। गुटबाजी बनाकर मेरी छवि धूमिल करने का प्रयास करने वाले विरोधियों को जल्द ही अपनी चाल में नाकामी मिलेगी।

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