एमसीडी का कहना है कि अब केवल नई शिकायतों ही नहीं बल्कि पुराने रिकॉर्ड और पहले दर्ज शिकायतों की भी समीक्षा होगी। अधिकारियों ने बताया कि सैदुल्लाजाब, साकेत, महरौली, पर्यावरण कॉम्प्लेक्स और फ्रीडम फाइटर्स एन्क्लेव समेत दक्षिण दिल्ली के कई इलाकों में अभियान चलाया जाएगा। विशेष रूप से ग्राउंड प्लस थ्री (जी+3) सीमा से अधिक निर्माण वाली इमारतों की जांच की जा रही है। जिन भवनों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। निर्धारित 72 घंटे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीलिंग, खाली कराने और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, विस्तृत रिपोर्ट जारी कर एमसीडी ने अपनी कार्रवाई और बचाव अभियान की जानकारी भी दी। रिपोर्ट के अनुसार, 30 मई की शाम 7:55 बजे जोनल कंट्रोल रूम को खसरा संख्या-262, गली नंबर-5, वेस्टर्न मार्ग स्थित भवन के ध्वस्त होने की सूचना मिली थी। इसके बाद कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता और अन्य कर्मचारियों को मौके पर रवाना किया गया। साथ ही जेसीबी, ट्रक और अन्य मशीनरी भी भेजी गई। एमसीडी के मुताबिक उसकी टीम करीब 8:30 बजे घटनास्थल पर पहुंच गई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस द्वारा क्षेत्र की घेराबंदी किए जाने के कारण अधिकारियों को रात लगभग 10:30 बजे तक अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिल सकी।
वहीं एमसीडी ने दावा किया कि भवन एवं अनुरक्षण विभाग की टीमें पिछले लगभग 42 घंटों से लगातार मलबा हटाने और राहत कार्य में जुटी रहीं। अभियान में तीन जेसीबी, दो पोकलेन, तीन हाइड्रा मशीनों समेत अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया गया तथा 80 से 90 ट्रक मलबा हटाया गया।
अनधिकृत कॉलोनी में था भवन
एमसीडी ने बताया कि करीब 300 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाला यह भवन एक अनधिकृत कॉलोनी में स्थित था, जो नियमितीकरण के लिए चिह्नित 1511 कॉलोनियों में भी शामिल नहीं है। भवन में बेसमेंट से दूसरी मंजिल तक का निर्माण 12-13 वर्ष पहले हुआ था, जबकि तीसरी-चौथी मंजिल का निर्माण हाल के वर्षों में किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और दमकल विभाग ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। स्निफर डॉग्स और भारी मशीनों की मदद से 24 लोगों का पता लगाया गया, जिनमें से 18 को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इनमें 12 घायलों को ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जबकि छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई।