पूर्व भारतीय कप्तान और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (सीएबी) के अध्यक्ष सौरव गांगुली की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की गई है। उनकी सुरक्षा को Z (जेड) कैटेगरी से घटाकर Y (वाई) कैटेगरी कर दिया गया है। गांगुली को पिछले कुछ वर्षों से जेड श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही थी। हालांकि, हालिया सुरक्षा समीक्षा के बाद राज्य प्रशासन ने उनकी सुरक्षा श्रेणी में बदलाव करने का फैसला लिया है।
सौरव ने सक्रिय राजनीति में आने से दूरी बनाए रखी
सौरव गांगुली का नाम लंबे समय से बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी उन्हें अपने प्रमुख चेहरे के रूप में सामने लाना चाहती थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके आवास पर मुलाकात भी की थी, लेकिन सौरव ने सक्रिय राजनीति में आने से दूरी बनाए रखी। इसके बावजूद भाजपा और सौरव के बीच संवाद बना रहा। वर्ष 2023 में उन्हें त्रिपुरा का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया था।
सौरव गांगुली का नाम लंबे समय से बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी उन्हें अपने प्रमुख चेहरे के रूप में सामने लाना चाहती थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके आवास पर मुलाकात भी की थी, लेकिन सौरव ने सक्रिय राजनीति में आने से दूरी बनाए रखी। इसके बावजूद भाजपा और सौरव के बीच संवाद बना रहा। वर्ष 2023 में उन्हें त्रिपुरा का ब्रांड एंबेसडर भी बनाया गया था।
गांगुली की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है
दूसरी ओर, सौरव ने ममता बनर्जी के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखे। ममता के स्पेन दौरे में वह उनके साथ गए थे और राज्य में औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यक्रमों में भी शामिल हुए थे। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा और तृणमूल दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की उनकी रणनीति अब नए राजनीतिक माहौल में अलग नजरिये से देखी जा रही है। हालांकि सुरक्षा में कटौती पर सौरव गांगुली की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राज्य सरकार के इस फैसले ने बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।
दूसरी ओर, सौरव ने ममता बनर्जी के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखे। ममता के स्पेन दौरे में वह उनके साथ गए थे और राज्य में औद्योगिक निवेश से जुड़े कार्यक्रमों में भी शामिल हुए थे। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा और तृणमूल दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की उनकी रणनीति अब नए राजनीतिक माहौल में अलग नजरिये से देखी जा रही है। हालांकि सुरक्षा में कटौती पर सौरव गांगुली की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राज्य सरकार के इस फैसले ने बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।







