Weather: बिहार के 18 जिलों बारिश-वज्रपात का अलर्ट, जून से सितंबर तक सामान्य से कम होगी वर्षा

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बिहार के कई जिलों में आंधी, गरज-चमक और वज्रपात की संभावना जताई गई है। राज्य के 18 जिलों को यलो अलर्ट श्रेणी में रखा गया है, जबकि शेष जिलों में किसी विशेष चेतावनी की आवश्यकता नहीं बताई गई है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, गया, पटना, नालंदा, नवादा, बेगूसराय, शेखपुरा और लखीसराय जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है।

उत्तर और पूर्वी बिहार के अधिकांश जिलों में राहत
सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका, जमुई, वैशाली, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर के लिए कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इन जिलों में आज सुबह से धूप निकली है। कई जिलों में वज्रपात के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है।

जून माह कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती
बिहार में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने के संकेत मिले हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर 2026 के बीच देश के साथ-साथ बिहार के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। इससे कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून काल (जून से सितंबर) के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। यह पूर्वानुमान किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की कृषि काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है।

और पढ़े  Bihar- बिहार के 10 जिलों ऑरेंज अलर्ट, वज्रपात ने नौ लोगों की जान ली, जानिए मौसम?

 

सामान्य से कम बारिश होने की आशंका
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, पूर्वानुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 के मानसून सीजन में पूरे देश में मौसमी वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) के 90 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। इसमें लगभग चार प्रतिशत की त्रुटि की संभावना भी बताई गई है। इसका अर्थ है कि इस वर्ष देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका सबसे अधिक है। वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में एल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की स्थितियों में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। नवीनतम जलवायु मॉडल संकेत देते हैं कि मानसून ऋतु के दौरान एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। आमतौर पर एल नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करने वाला माना जाता है। मानसून के कमजोर रहने की आशंका के बीच कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाने की जरूरत होगी। समय पर वर्षा नहीं होने की स्थिति में धान सहित खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।


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