लुधियाना पुलिस ने कॉल सेंटर की आड़ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। आरोपी फर्जी वायरस अलर्ट भेजकर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते थे और उनसे नकदी, सोना व महंगे गिफ्ट ठग लेते थे। पुलिस ने इस गिरोह के 132 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मास्टरमाइंड फिलहाल दिल्ली और गुजरात में बैठे हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें रवाना हो चुकी हैं।
आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 1.07 करोड़ रुपये की नकदी, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं। वहीं, 300 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। पुलिस को इन्हीं खातों से संदिग्ध लेनदेन का शक है। साइबर पुलिस की टीमें मामले की गहन जांच में जुटी हैं।
पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई के दौरान विशेष टीमों ने संधू टॉवर और सिल्वर ओक में दबिश देकर वहां चल रहे कॉल सेंटर को घेर लिया। मौके से सभी आरोपी और सामान जब्त कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, हर ऑपरेटर को प्रतिदिन 8-10 कॉल करने का लक्ष्य दिया जाता था। हर दिन एक टीम लाखों रुपये की हेराफेरी करती थी। आयकर विभाग ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस फिलहाल डिजिटल साक्ष्यों, हवाला लिंक और गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।
ऐसे चलता था ठगी का खेल
आरोपी विदेशी नागरिकों के कंप्यूटर स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट के नाम से फर्जी वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजते थे। स्क्रीन पर एक नकली कस्टमर केयर नंबर दिखता था। अलर्ट देखकर पीड़ित तुरंत उस नंबर पर कॉल करता था। यह कॉल एक्स-लाइट सॉफ्टवेयर के जरिए सीधे ठगों तक पहुंचती थी।
आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी बताकर अल्ट्रा व्यूअर जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवा लेते थे और पीड़ित के मोबाइल या कंप्यूटर का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते थे। इसके बाद स्क्रीन पर फर्जी पॉप-अप दिखाकर उन्हें डराया जाता था कि उनका बैंक अकाउंट या ईमेल हैक हो गया है, या कंप्यूटर में अश्लील सामग्री मिली है। फिर ठगी की जाती थी।
हवाला के जरिए भारत आता था ठगी का माल
ठगी का शिकार बनाने के बाद नकदी, सोना और गिफ्ट को भारत लाने के लिए हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध चैनलों का इस्तेमाल किया जाता था। गिरोह में कई टीमें बनी हुई थीं और हर टीम में 6 लोग थे। पहले एक सदस्य पीड़ित को झांसे में लेकर सिस्टम की एक्सेस लेता था, फिर दूसरा सदस्य खुद को बैंक अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करवा लेता था।
फर्जी विदेशी खातों में वायर ट्रांसफर
आरोपी विदेशी नागरिकों से फर्जी विदेशी खातों में वायर ट्रांसफर भी करवाते थे। यह एक इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन होता है, जिससे बड़ी रकम तुरंत भेजी जा सकती है। ठगी के आरोपियों को वेतन के अलावा प्रोत्साहन राशि भी दी जाती थी। इस मामले में डिजिटल साक्ष्य, हवाला लिंक, क्रिप्टो लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि मास्टरमाइंड गरीब परिवारों के युवक-युवतियों को जल्द अमीर बनने के सपने दिखाकर इस गिरोह में शामिल करता था।
132 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने थाना साइबर क्राइम में बीएनएस व आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहर में कुछ कॉल सेंटर विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बना रहे हैं। इसी सूचना पर यह बड़ी कार्रवाई की गई। आयकर विभाग को भी जांच में शामिल कर लिया गया है। – स्वपन शर्मा, पुलिस कमिश्नर








