पीजीआई के न्यूक्लियर मेडिसिन और आर्थोपेडिक विभाग की संयुक्त टीम ने पिछले तीन वर्षों में करीब 80 मरीजों पर इस तकनीक का सफल उपयोग किया है। यह शोध विश्व में अपने प्रकार का पहला माना जा रहा है और इसे वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय जर्नल ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड मॉलीक्युलर इमेजिंग में प्रकाशित किया गया है। यह जानकारी न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अनीश भट्टाचार्य, डॉ. राजेन्द्र और आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. विशाल ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर दी।
विभागाध्यक्ष डॉ. अनीश भट्टाचार्य ने बताया कि कमर दर्द और जोड़ों की समस्या आज आम हो चुकी है लेकिन सटीक इलाज अब तक चुनौती बना हुआ था। इस तकनीक में फ्लोरीन-18 सोडियम फ्लोराइड पेट-सीटी स्कैन के माध्यम से शरीर में दर्द के असली स्रोत की पहचान की जाती है और फिर उसी स्थान पर रोबोटिक सहायता से इंजेक्शन दिया जाता है।