देहरादून: सरकारी संपत्ति पर पोस्टर लगाने के मामले में पूर्व मंत्री शूरवीर सजवाण बरी, जानें..

 

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ईशांक राजपूत की कोर्ट ने सरकारी संपत्ति पर बिना अनुमति पोस्टर लगाने के आरोप से पूर्व कैबिनेट मंत्री शूरवीर सजवाण को बरी कर दिया। वर्ष 2007 के इस मामले में अभियोजन एक भी गवाह पेश नहीं कर पाया। इसके अलावा जो दस्तावेजी साक्ष्य थे उन्हें भी साबित नहीं कर पाया। लिहाजा कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में सजवाण को बरी कर दिया।

 

प्राथमिकी रायपुर थाने में तत्कालीन सीओ विमल टम्टा की ओर से दर्ज कराई गई थी। नौ फरवरी 2007 में शिकायत में बताया कि वह क्षेत्र में अपने अधीनस्थों के साथ भ्रमण पर थे। उन्होंने देखा कि रायपुर क्षेत्र के सरकारी स्कूल और अन्य सरकारी भवनों पर कांग्रेस नेता शूरवीर सजवाण, यूकेडी की बिंदु राजपूत और बीजेपी के प्रेमचंद अग्रवाल के चुनाव प्रचार के पोस्टर और झंडे आदि लगे थे। इसके लिए उन्होंने कोई अनुमति भी नहीं ली थी।

 

ऐसे में यह उत्तरांचल लोक संपत्ति विरुपण अधिनियम के तहत अपराध है। इस मामले में पिछले साल नौ दिसंबर को शूरवीर सजवाण के खिलाफ आरोप तय किए गए। सजवाण ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इन्कार किया।

अभियोजन की ओर से इस मामले में एक भी गवाह प्रस्तुत नहीं किया गया। अदालत ने अभियोजन को पूरा समय दिया लेकिन 19 साल में अभियोजन इस बात को साबित नहीं कर पाया कि ये पोस्टर आरोपी ने लगवाए थे। ऐसे में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में शूरवीर सजवाण को बरी कर दिया।

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