आईएनएस अरिदमन नौसेना में शामिल, स्वदेशी पनडुब्बी से बढ़ी ताकत, रक्षा मंत्री बोले- शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’

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क्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में नौसेना के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस आयोजन के दौरान भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। परमाणु शक्ति और बैलिस्टिक मिसाइल से लैस देश की इस तीसरी पनडुब्बी के नौसेना में शामिल होने से सेना की ताकत बढ़ी है। कमीशन किए जाने से पहले रक्षा मंत्री ने आज अपने एक्स हैंडल पर लिखा- ‘शब्द नहीं शक्ति है, ‘अरिदमन’!’

 

क्यों खास है अरिदमन पनडुब्बी?
पानी के भीतर करीब 44 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली अरिदमन का पता लगाना काफी मुश्किल है। के-15 और के-4 जैसी घातक बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस अरिदमन नौसेना की तीसरी ऐसी पनडुब्बी है जो परमाणु ताकत से लैस है। बैलिस्टिक मिसाइल वाली इस पनडुब्बी से भारत की परमाणु प्रतिरोधक और मारक क्षमता उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी।

 

  • पानी के ऊपर इसका वजन लगभग 6,000 टन।
  • पूरी तरह जलमग्न होने पर वजन बढ़कर 7,000 टन। (क्योंकि इसमें पानी भर जाता है)।
  • करीब 95 से 100 कर्मियों का दल इस पनडुब्बी को संचालित करता है।
  • अरिदमन पर नौसेना अधिकारियों के अलावा नाविकों (सेलर्स) की भी तैनाती।
  • संचालन में 83 मेगावाट के छोटे परमाणु रिएक्टर (न्यूक्लियर इंजन) का इस्तेमाल।
  • यह तकनीक तमिलनाडु के कलपक्कम में विकसित पुराने नौसैनिक रिएक्टर पर आधारित।

अरिदमन बड़ी और अधिक शक्तिशाली, नौसेना को एक और सौगात…
आईएनएस अरिदमन आकार और क्षमता के लिहाज से पहले वाली दोनों पनडुब्बियों से बड़ी और अधिक शक्तिशाली है। इस श्रृंखला में बनाई जा रही चौथी एसएसबीएन फिलहाल समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल) के दौर में है। इसे अगले वर्ष नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है। चौथी पनडुब्बी भी अरिदमन श्रेणी की ही होगी।

अरिदमन से पहले नौसेना के पास कौन सी पनडुब्बियां थीं?
भारत की परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) परियोजना के तहत आईएनएस अरिहंत पहला पोत था। इसके बाद आईएनएस अरिघात को नौसेना में शामिल किया गया था। आईएनएस अरिहंत को जुलाई 2009 में लॉन्च किया गया था जिसे 2016 में नौसेना में शामिल किया गया। दूसरी पनडुब्बी अगस्त 2024 में कमीशन की गई।

आईएनएस तारागिरी भी कमीशन हुआ, क्या है खासियत?
पनडुब्बी के अलावा भारतीय नौसेना को आज 75 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री वाले युद्धपोत- आईएनएस तारागिरी की सौगात भी मिली। नौसेना में अरिदमन और तारागिरी की कमीशनिंग ऐसे समय में हुई है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्यों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भागीदारी के कारण भारत के पूर्वी तट का रणनीतिक और समुद्री महत्व भी लगातार बढ़ रहा है।

और पढ़े  कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 आज से शुरू, पहले दिन भारत के कौन-कौन खिलाड़ी उतरेंगे, कब होगा ओपनिंग सेरेमनी?

 

  •  प्रोजेक्ट 17ए श्रेणी के चौथे शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के रूप में, तारागिरी महज एक जहाज नहीं है।
  • यह 6,670 टन का एक ऐसा प्रतीक है जो ‘मेक इन इंडिया’ की भावना और हमारे स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं को दर्शाता है।

आईएनएस तारागिरी के बारे में और जानिए
मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल)  की और से निर्मित यह फ्रिगेट अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत छलांग का प्रतिनिधित्व करता है। इसका  आकार और रडार क्रॉस-सेक्शन में उल्लेखनीय कमी इसे घातक स्टील्थ तकनीक से संचालित करने में सक्षम बनाती है। 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से युक्त यह जहाज घरेलू औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की परिपक्वता को दर्शा


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