महत्वपूर्ण नियम- SIM से लेकर UPI पेमेंट तक बदलने वाले हैं ये नियम: आपकी जेब पर होगा असर, 1 मार्च से क्या-क्या बदलेगा?

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र बार की तरह इस महीने भी 1 मार्च 2026 से कई नियमों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। महीने की पहली तारीख अक्सर नीतिगत और प्रशासनिक परिवर्तनों के लिए अहम मानी जाती है, जिनका सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या और जेब पर पड़ता है। आइए विस्तार से जानते हैं, किन नियमों में होने वाला है बड़ा बदलाव।

 

सिम बाइंडिंग नियम लागू
मोबाइल यूजर्स के लिए नया नियम लागू होगा जिसके तहत व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को उसी फोन के सक्रिय सिम से लिंक करना जरूरी होगा जिसमें एप चल रहा है। यानी जिस डिवाइस पर एप इस्तेमाल कर रहे हैं, उसमें संबंधित सिम का होना अनिवार्य होगा। साथ ही वेब या डेस्कटॉप लॉगिन के लिए छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम लागू किया जाएगा। यानी कि 6 घंटे के बाद अब से वेब या डेस्कटॉप अपने आप लॉगआउट हो जाएगा। इसका उद्देश्य फर्जी नंबरों और साइबर अपराधों पर रोक लगाना है।

👉 रेलवे का पुराना ऐप बंद
1 मार्च से रेलवे अपना पुराना UTS एप बंद कर रहा है। इसके बाद यात्री इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। अनारक्षित और प्लेटफॉर्म टिकट बुक करने के लिए अब यात्रियों को नए Railone एप का उपयोग करना होगा। इससे यात्रियों को नई प्रणाली अपनानी होगी। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम अधिक तेज, सुरक्षित और उपयोगकर्ता-अनुकूल होगा। इस नए एप में टिकट बुक करने पर आपको काफी छूट भी मिलेगी।

👉 एलपीजी की कीमतों में हो सकता है बदलाव
हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें जारी होती हैं। होली के त्योहार को देखते हुए लोगों को उम्मीद है कि इस बार कीमतों में राहत मिल सकती है, हालांकि अंतिम फैसला सरकार की घोषणा के बाद ही साफ होगा।

👉 न्यूनतम बैलेंस नियम में राहत
बैंकिंग से जुड़ा एक संभावित राहत भरा बदलाव भी सामने आ सकता है। कुछ सरकारी बैंक मिनिमम बैलेंस की गणना के तरीके में बदलाव कर सकते हैं। पहले किसी एक दिन बैलेंस कम होने पर पेनल्टी लग जाती थी, लेकिन अब एवरेज मंथली बैलेंस (AMB) के आधार पर शुल्क तय किया जा सकता है। यानी पूरे महीने का औसत बैलेंस महत्वपूर्ण होगा, जिससे ग्राहकों को पेनल्टी से बचने में आसानी हो सकती है।

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👉 यूपीआई पेमेंट में बढ़ेगी सुरक्षा
डिजिटल भुगतान को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए 1 मार्च से बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर सिर्फ यूपीआई पिन पर्याप्त नहीं होगा। बैंक उच्च राशि के लेनदेन के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जैसे बायोमेट्रिक या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर सकते हैं। बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन लागू किया जा सकता है। यानी केवल यूपीआई पिन के बजाय बायोमेट्रिक या अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ सकती है। इसका मकसद ऑनलाइन फ्रॉड को कम करना और यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाना है।

 

👉 किराये को लेकर बदल सकते हैं नियम
किराये के नियमों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए या रिन्यू होने वाले रेंट एग्रीमेंट के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया जा सकता है। साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट को अधिकतम दो महीने के किराए तक सीमित करने और मकान मालिक के प्रवेश से पहले पूर्व सूचना जैसे प्रावधानों पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किरायेदार और मकान मालिक के बीच विवाद कम हों।


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