सुप्रीम कोर्ट ने थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम विवाद में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकार रखा है और कहा है कि पहाड़ी के नेल्लीथोप्पु इलाके में मुस्लिम रमजान और बकरीद पर नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन हर दिन वहां नमाज अदा नहीं कर सकते। थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित नेल्लीथोप्पु इलाके पर सिकंदर बादुशा औलिया दरगाह का मालिकाना हक है। थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की तलहटी में भगवान सुब्रमण्य स्वामी का मंदिर है और इस पहाड़ी को भगवान सुब्रमण्य का घर माना जाता है, जिसके चलते सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए यह पहाड़ी पवित्र है। इस पहाड़ी पर मंदिर के साथ ही एक दरगाह भी है, जिसके चलते यहां नमाज पढ़ने और पशु बलि को लेकर विवाद हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बताया संतुलित
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- बीते साल अक्तूबर में मद्रास हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस इलाके में पशुओं की बलि पर रोक लगा दी थी।
- हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए दरगाह के एक इमाम ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
- याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वाराले की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट के आदेश को संतुलित आदेश बताया।
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- बीते साल दिसंबर में मद्रास हाईकोर्ट ने दरगाह के नजदीक दीपाथून जगह पर दीप प्रजवलित करने की इजाजत दी थी। जिसे लेकर खूब विवाद हुआ।
- हालांकि राज्य सरकार ने कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर हाईकोर्ट का आदेश नहीं माना था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की थी।
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- तमिलनाडु सरकार ने अवमानना आदेश के खिलाफ लेटर पेटेंट अपील दायर की थी, जिसे डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया।
- इसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची। इसी बीच राज्य सरकार, पुलिस, दरगाह और तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने भी एकल जज के आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच का रुख किया था।
- अंततः 6 जनवरी को जस्टिस जी. जयचंद्रन और जस्टिस के.के. रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज का आदेश बरकरार रखा।







