देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिक हर पल तत्पर रहते हैं। चाहे भीषण ठंड हो या तपता रेगिस्तान, घने जंगल हों या ऊंचे पहाड़, हमारे जवान हर परिस्थिति में डटे रहते हैं। उनकी ड्यूटी सिर्फ शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद चुनौतीपूर्ण होती है। माइनस में तापमान और विपरीत परिस्थितियों का जवानों की सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर पड़ता है।
कई रिपोर्ट्स इस बात को लेकर पहले से चिंता जताती रही हैं कि भारतीय सैनिकों को ज्यादा स्ट्रेस, खराब मौसम, कम तापमान और मुश्किल ड्यूटी की वजह से जानलेवा कार्डियक अरेस्ट का खतरा भी अधिक रहता है। सेना में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों का कोई खास डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि सेना में हर एक लाख जवानों में 10.8 को अचानक कार्डियक अरेस्ट होता है और 17-24 साल की उम्र वालों में यह दर 5.9 है।
हाल ही में 4 जनवरी को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार क्षेत्र में तैनात जवान जीतू बेहेरा की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।
सीमा पर तैनात जवानों के दिल की सुरक्षा करने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों की टीम ने एक स्वदेशी चिप डिवाइस तैयार की है जो हार्ट अटैक से पहले ही उन्हें अलर्ट कर देगी। सैनिकों के दिल की सुरक्षा की दिशा में इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








