अयोध्या: 1341 गांव की रज..103 नदियों का जल और 1121 किमी पैदल चल रामनगरी पहुंचे युवक, लिया था ये संकल्प

 

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के खेड़ी सावलीगढ़ गांव निवासी धनंजय सिंह व गोरेगांव निवासी केसो मोरले बृहस्पतिवार को रामनगरी अयोध्या पहुंचे। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पूर्व युवकों का दल रामायण मंडल के नाम से साप्ताहिक मानस पाठ करता था। यह दल 2015 में जन्मभूमि पर मानस पारायण के लिए अयोध्या आया और वेद मंदिर में पाठ किया।

इस दौरान अपने आराध्य प्रभु रामलला को टेंट में देख पारायण में आए लगभग 12 युवकों के मन में खिन्नता हुई। मंदिर बन जाने के बाद ही दोबारा दर्शन करने का संकल्प लिया। 05 अगस्त 2020 को हुए भूमि पूजन व 22 जनवरी 2024 को हुई प्राण प्रतिष्ठा के बाद कुछ करने की अंतःप्रेरणा हुई।

उन्होंने बताया कि खाली हाथ आने की परंपरा नहीं, क्या ला सकते थे? इस पर विचार आया कि देश के गांवों की पवित्र चंदन रूपी मिट्टी व क्षेत्र की नदियों का जल संकलित करें। लगभग 300 साथियों के सहयोग से सूर्य पुत्री ताप्ती, चंद्रपुत्री पुरना, बेल, बेतवा, देवना, तवा, काजल, मोरण, बेलगंगा, सूखी नदी, सापना सहित इलाके को जीवन देने वाली 103 बड़ी छोटी नदियों, सहायक नदियों का जल व जनपद के 1490 गांवों में से 1341 गांवों की पवित्र मिट्टी एकत्र की गई। इसमें लगभग 50 दिन का समय लगा।

27 दिसंबर को बैतूल के गंज स्थित राधाकृष्ण मंदिर में भगवा ध्वज के पूजन आरती के साथ शुरू हुई पदयात्रा में प्रतिदिन औसतन 50 किमी की दूरी तय की गई। रास्ते को विभिन्न 30 पड़ावों पर विश्राम लेते हुए पदयात्री 20 जनवरी को अयोध्या के ब्रह्मदेव स्थान पहुंचे।

22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय का समय मिलने पर कारसेवकपुरम पहुंचे। जल और मिट्टी उन्हें समर्पित की। साथ ही 21 जनवरी को श्रीरामलला के दर्शन के दौरान परिसर की माटी ली। सायंकाल सरयू को प्रणाम करके सरयू रज क्षेत्रीय सहयोगियों को वितरित करने के लिए एकत्र किया। पूरे कार्यक्रम में संघ के मध्य क्षेत्र प्रचारक सप्लेश कुलकर्णी, प्रांत प्रचारक विमल गुप्त व जिला प्रचारक अंबाराम ने सहयोग दिया।

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