नीट-पीजी- SC पहुंचा नीट पीजी कटऑफ का मुद्दा, याचिका दायर, एनबीईएमएस के फैसले को चुनौती

Spread the love

नीट-पीजी 2025-26 के लिए योग्यता कट-ऑफ प्रतिशत घटाने को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) द्वारा 13 जनवरी को जारी उस नोटिस के खिलाफ दाखिल की गई है, जिसमें क्वालिफाइंग कट-ऑफ को कम किया गया था।

 

यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन, न्यूरोसर्जन सौरव कुमार, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल और वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सदस्य डॉ. आकाश सोनी द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि विवादित नोटिस के माध्यम से कट-ऑफ को असामान्य रूप से बेहद कम, यहां तक कि शून्य और नकारात्मक स्तर तक घटा दिया गया है।

 

मामला एक नजर में: 

    • 13 जनवरी को एनबीईएमएस ने नीट पीजी की कटऑफ संशोधित की।
    • इस संशोधन में कट-ऑफ प्रतिशत को बहुत कम कर दिया गया, यहां तक की शून्य कर दिया गया।
    • इस बदलाव के बाद -40 अंक पाने वाला भी मेडिकल की पढ़ाई के लिए योग्य हो गया था।
    • नोटिस जारी होने पर इस फैसले का विरोध होने लगा।
    • डॉक्टर संगठनों समेत अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख को गंभीर खतरा है।
  • एनबीईएमएस के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।

संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है यह फैसला

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में इसे संवैधानिक चुनौती बताते हुए कहा गया है कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा के लिए योग्यता मानकों में की गई यह कटौती मनमानी है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करती है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इससे मरीजों की सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पेशे की साख को गंभीर खतरा पैदा होता है।

और पढ़े  Earthquake: जापान के क्यूशू इलाके में आया 7.1 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी

याचिका में कहा गया है कि चिकित्सा कोई सामान्य पेशा नहीं है, बल्कि यह सीधे मानव जीवन, शारीरिक अखंडता और गरिमा से जुड़ा हुआ है। केवल खाली सीटें भरने के आधार पर इस तरह का निर्णय मेरिट को समाप्त करता है, प्रतियोगी परीक्षा को महज औपचारिकता में बदल देता है और जीवन से जुड़े क्षेत्र में पेशेवर मानकों के पतन को संस्थागत रूप देता है।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि पीजी स्तर पर मेरिट में की गई यह ढील राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

क्या है मामला?

नीट-पीजी 2025‑26 के लिए एनबीईएमएस ने 13 जनवरी 2026 को एक नोटिस जारी किया, जिसमें पीजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए योग्यता कट‑ऑफ को असामान्य रूप से कम कर दिया गया। इसे आरक्षित वर्ग के लिए -40 अंक तक कर दिया गया। एनबीईएमएस के इस फैसले का विरोध हो रहा था और अब फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।


Spread the love
  • Related Posts

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग- 1 वर्षीय पोस्टग्रेजुएट कोर्स को मिली हरी झंडी, ऑनलाइन पढ़ाई का भी मिलेगा विकल्प

    Spread the love

    Spread the loveविश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पात्र उच्च शिक्षण संस्थानों को ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ODL) और ऑनलाइन माध्यम से एक वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति…


    Spread the love

    2026 सावन आज से शुरू, जानिए शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का महत्व और कब है सावन शिवरात्रि

    Spread the love

    Spread the loveहिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन साल का पांचवां महीना होता है। श्रावण माह में शिव जी की पूजा-उपासना का विशेष महत्व होता है। आज से सावन का महीना…


    Spread the love