बांग्लादेश से ऐसे होती है भारत में घुसपैठ, 38 बांग्लादेशियों ने खोले थे चाैंकाने वाले राज

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गरा जिला जेल से शनिवार को रिहा किए गए 38 बांग्लादेशी फेनी नदी पार करके भारत आए थे। गिरफ्तारी के समय सिकंदरा पुलिस की पूछताछ में पता चला था कि सभी अपने देश और भारत में सक्रिय एजेंट की मदद से पश्चिम बंगाल होते हुए अलग-अलग राज्यों में चले गए थे। एजेंट फर्जी आधार कार्ड के साथ वोटर कार्ड और पैन कार्ड तक तैयार कर उन्हें उपलब्ध करा देते हैं। पुलिस ने बांग्लादेशियों को जेल भेज दिया, लेकिन उन्हें भारत लाने वाले और शरण देने वाले नहीं पकड़े जा सके। इस वजह से लगातार मामले सामने आ रहे हैं।

फरवरी 2023 में जी-20 सम्मेलन से पहले पुलिस ने सिकंदरा के आवास विकास कॉलोनी स्थित सेक्टर 14 में झोपड़ी डालकर रह रहे बांग्लादेशियों को पकड़ा था। उनके पास से भारी मात्रा में फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड आदि बरामद हुए थे। बांग्लादेशी हालिम ने पुलिस को कई जानकारी उपलब्ध कराई थीं। उसने बताया था कि बांग्लादेश में कई एजेंट सक्रिय हैं, जो रुपये लेकर सीमा पार कराते हैं। बॉर्डर के गांव से नदी पार कराकर वह पश्चिम बंगाल और बिहार होते हुए अलग-अलग राज्यों में चले जाते हैं। इनका काम करने का तरीका भी अलग है। यह आम लोगों से दूरी बनाकर रखते हैं। कूड़ा, कबाड़ा और बायोमेडिकल वेस्ट इकट्ठा करने का काम करते हैं। कबाड़ का काम करने के कारण इनसे ज्यादा लोग संपर्क में नहीं आते हैं। कहीं भी खाली स्थान देखकर बस्ती बनाकर रहने लगते हैं। हालिम ने कई लोगों के नाम बताए थे जो उनकी मदद कर रहे थे। थाना सिकंदरा पुलिस ने बांग्लादेशियों को तो जेल भेज दिया लेकिन एजेंट नहीं पकड़े गए।

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हवाला के जरिए खातों में आई थी रकम
पुलिस ने बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी के बाद उनके दस्तावेज चेक किए थे। इसमें पता चला कि हालिम आगरा में दयालबाग क्षेत्र में रहने लगा था। उसने वहां के पते पर पैन कार्ड बनवा लिया था। इसकी मदद से उसका बैंक खाता खुल गया। एलआईसी की पॉलिसी कराई और इसकी रसीद से आधार कार्ड बनवा लिया। उसकी मदद एजेंटों ने की थी। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों को भी चेक किया था। इसमें हवाला से रकम आने की पुष्टि हुई थी। हालिम ने किराए का मकान लिया था।

 

विवादित जमीन पर झोपड़ियां बनाकर रहे
पुलिस ने आवास विकास कॉलोनी में 100 से अधिक झोपड़ियां देखी थी, वह जमीन विवादित निकली। इस वजह से जमीन पर कोई जाता नहीं था। वर्षों से रह रहे बांग्लादेशियों की पुलिस को कोई भनक नहीं थी। आईबी ने इनपुट के बाद पड़ताल की तब बांग्लादेशी पकड़े जा सके थे। आगरा में सदर के वेद नगर इलाके में बांग्लादेशियों की पूरी बस्ती मिली थी। रूनकता में भी बांग्लादेशी पकड़े जा चुके हैं, वहीं यमुना पार इलाके में फातिमा नामक महिला सब्जी बेचती थी। वह नकली नोटों को खपाती थी। इस मामले में वर्ष 2017 में एनआईए ने कार्रवाई की थी। फातिमा बांग्लादेश के चौपाई नवाबगंज जिले की रहने वाली थी और बिना वीजा के भारत में आई थी। शेर अली से निकाह के बाद वह सब्जी बेचने का काम कर रही थी।

Bangladeshi citizens were sent back from Agra to Bangladesh After completing their sentences
13 जनवरी को बांग्लादेश में प्रवेश करेंगे
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि रिहा हुए बांग्लादेशियों में 15 पुरुष, 12 महिलाएं और 11 बच्चे हैं। इनमें से पांच बच्चे जिला जेल में ही रह रहे थे जबकि बाकी 6 को किशोर गृह में रखा गया था। 3 साल की सजा पूरी करने पर उनकी रिहाई हुई है। सभी को कड़ी सुरक्षा में एक बस में पश्चिम बंगाल के लिए रवाना किया गया है। एक इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में सभी पहुंचेंगे। पश्चिम बंगाल पहुंचने के बाद सभी को आईबी के अधिकारियों के सुपुर्द किया जाएगा। 13 जनवरी को बीएसएफ की मदद से यह लोग बांग्लादेश की सीमा में प्रवेश करा दिए जाएंगे। जिला जेल में अभी दो बांग्लादेशी और बंद हैं। उनकी सजा फरवरी में पूरी होनी है। उनके प्रत्यर्पण के लिए पुलिस ने अभी से विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

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Bangladeshi citizens were sent back from Agra to Bangladesh After completing their sentences
वेद नगर की बस्ती से जुड़े मिले थे घुसपैठियों के तार
आवास विकास कॉलोनी में पकड़े गए 38 बांग्लादेशियों के तार सदर की वेद नगर बस्ती से भी जुड़े मिले थे। यह बस्ती 11 साल पहले काफी चर्चा में रही थी। यहां पर सामूहिक धर्मांतरण का मामला सामने आया था। तब बस्ती में बांग्लादेशियों के रहने की जानकारी मिली थी। तब भी बांग्लादेशियों ने फर्जी आधार कार्ड बनवा रखे थे। वर्ष 2014 में धर्मांतरण की बात वेद नगर बस्ती में सामने आई थी।

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