हल्द्वानी- पुलिस-प्रशासन की चूक से सड़क पर काल बनी गाड़ी, NO-एंट्री में भारी वाहन से कुचला गया अर्जुन

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ल्द्वानी में आखिर किन हाथों से अर्जुन को मौत देने की परमिशन मिली? जब भारी वाहनों का प्रवेश तय समय-सीमा तक वर्जित है तो नियम रौंदते इस वाहन को कैसे प्रवेश मिल गया। शहर की सड़कों पर डंपर समेत ऐसे वाहनों का तांडव पहले ही नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाता रहा है जिन्हें पुलिस-प्रशासन रोक नहीं पाता है। तो फिर सर्द मौसम में ट्रक, डंपर और भारी वाहनों के नो इंट्री में प्रवेश से थाना और चौकियां गरम होती रहीं?

अर्जुन मौर्य को खौफनाक मौत देने के लिए जो वाहन सड़क पर उतरा उसे नो-इंट्री में कैसे आने दिया गया। सुबह आठ से शाम आठ बजे तक शहर के मार्गों पर बड़े वाहनों की नो एंट्री के वक्त यह वाहन सड़क पर क्यों था। इसे परमिशन देते वक्त हुई मंत्रणा में पुलिस, प्रशासन को ऐसा क्या विशेष दिखा जिससे यह तय हो गया कि यह सड़क पर काल बनकर नहीं दौड़ेगा। लोगों की जान से खेलने की कीमत पर शहर में ऐसा कौन सा विकास कार्य चल रहा है जिससे ऐसे वाहन को नो एंट्री में परमिशन देकर किसी को रौंद दिया गया। अर्जुन की मौत के बाद अब ऐसे तमाम सवाल पुलिस, प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। पुलिस, प्रशासन की वाहन को नो इंट्री में घुसने की गलत परमिशन ने होरी लाल के परिवार को अथाह दुख में धकेल दिया। होरी लाल का मंझला बेटा ललित अपने छोटे भाई अर्जुन के साथ मुखानी से ऊपर की तरफ आ रहा था, उससे पहले नैनीताल रोड पर कॉलटैक्स के पास खड़े पुलिसकर्मियों ने यमदूत को उस रोड पर घुसने की इजाजत दे दी। यह इजाजत बाद में अर्जुन का कत्ल करने के लिए दी गई इजाजत साबित हुई। सड़क पर मौत बांटते जिन वाहनों को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने नो एंट्री की लकीर खींची थी उसे इस विशेष यमदूत के लिए मिटा दिया गया था। यही बात इस पूरे प्रकरण के लिए पुलिस-प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर देती है।

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गड्ढा भी एडीबी का और वाहन भी उसी के काम में

एडीबी की ओर से चल विकास कार्यों के तहत सड़क पर यह जानलेवा गड्ढा कुछ दिन पूर्व बना था। इसी गड्ढे में उछलने से एडीबी के काम में लगे वाहन की चपेट में आने से अर्जुन की मौत हो गई। बताया जा रहा कि कुछ दिन पूर्व इसी गड्ढे में उछलकर एक ई-रिक्शा सड़क पर पलट गया था और उसमें सवार लोगों को चोटें आई थीं।

फुटपाथ से दुर्घटना होते ही दुकानदार गायब

जिस स्थान पर यह हादसा हुआ वहां और उसके आसपास पूरी नहर कवरिंग रोड की फुटपाथ पर फड़-ठेलों का कब्जा रहता है। इस कारण सड़क पर जाम की स्थिति रहती है। सोमवार को भी यही हाल था, मगर जैसे ही दुर्घटना घटित हुई उसके कुछ देर बाद ही यहां से फड़-ठेले वाले गायब हो गए। हालांकि दुर्घटना से कुछ ऊपर और नीचे अतिक्रमण बदस्तूर जारी था।

हादसा सरासर प्रशासन की चूक : मेहता

पार्षद चंदन मेहता ने इस दुर्घटना के बाद एडीबी समेत प्रशासन, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि नो एंट्री में आखिर इस वाहन को कैसे परमिशन दे दी। अगर यह नियम बनाया था तो क्यों? उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को कम से कम दस लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

करीब 40 साल पहले बसा था परिवार

मृतक अर्जुन के पिता होरी लाल अपने पिता के साथ यहां करीब 40 वर्ष पूर्व आकर मजदूरी के साथ ही बंटाईदारी का काम करने लगे थे। बाद में उनकी चार संतानें हुईं जिनमें बड़ी बेटी और उसके बाद तीन बेटे धमेंद्र, ललित और अर्जुन थे। बेटी की शादी हो चुकी है। घटना के बाद अर्जुन की मां ओमवती लगातार अपने छोटे बेटे को पुकारती रहीं। घर में सबसे छोटा होने के चलते अर्जुन सबका चहेता भी था। वह पढ़ाई के साथ ही बंटाईदारी के काम में पिता और भाइयों का हाथ भी बंटाता था।

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क्यों जान से खेल रहे हैं सिटी मजिस्ट्रेट

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक मिक्सचर वाहन समेत ऐसे वाहनों को चलने की अनुमति प्रशासन देता है। सवाल यह है कि विकास के नाम पर भारी वाहनों को इंट्री की अनुमति देकर आखिर लोगों की जान से क्यों खेला जा रहा है। फिर युद्ध स्तर पर ऐसा कौन सा निर्माण कार्य हो रहा है, जिसके लिए विकास कार्यों के नाम पर ऐसे वाहनों को नो इंट्री में जाने दिया गया। मामले में जब सिटी मजिस्ट्रेट से मोबाइल पर संपर्क की कोशिश गई, मगर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

यह घटना दुखद है, कम उम्र में एक बच्चे की जान चली गई। शहर के बीचों-बीच यह घटना हुई है, इसे रोका जा सकता था। संबंधित एजेंसी को प्रीकॉशन लेना चाहिए था। इस पूरे प्रकरण में एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित कर दी गई है जिसके रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। -ललित मोहन रयाल, जिलाधिकारी।

शहर में भारी वाहनों के लिए नो इंट्री बनाई गई है, जिस जगह यह घटना हुई, वह नो इंट्री में आता है। विभिन्न प्वाइंट्स पर यातायात पुलिस कर्मी तैनात हैं जो डंपर जैसे भारी वाहनों को आने से रोकते हैं। मिक्सचर वाहन विकास के कार्य से जुड़ा था और इसकी परमिशन सिटी मजिस्ट्रेट के स्तर से प्रशासन द्वारा जारी की गई है, इस वजह से इस वाहन को नहीं रोका गया। – महेश चंद्रा, ट्रैफिक इंस्पेक्टर


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